ईरान-अमेरिका के बीच तनाव: हमले और बातचीत का जटिल समीकरण
बातचीत के बीच अमेरिका का हमला
हाल ही में यह कहा जा रहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता अपने अंतिम चरण में है, जिससे शांति की उम्मीदें जगी थीं। लेकिन इसी बीच, अमेरिका ने एक बड़ा हमला किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई 'सेल्फ डिफेंस' के तहत की गई है, जिसमें समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नाव को निशाना बनाया गया। बताया गया है कि ये हवाई हमले दक्षिणी ईरान के उन स्थानों पर किए गए हैं, जहां मिसाइल लॉन्चिंग के लिए तैयारी की जा रही थी।
हमले का समय और इजरायल की भूमिका
यह हमला उस समय हुआ है जब उम्मीद की जा रही थी कि अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बन जाएगी, जिससे ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर सहमत हो जाएगा। दक्षिणी ईरान में इस हमले के अलावा, बंदर अब्बास में भी बम धमाके की सूचना मिली है। कतर की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें जारी हैं। इस बीच, इजरायल ने लेबनान पर हमले जारी रखे हैं, और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन हमलों को बढ़ाने के संकेत दिए हैं।
हमले का औचित्य
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने बताया है कि ये हमले अमेरिकी सैनिकों को ईरानी सेना से संभावित खतरों से बचाने के लिए किए गए हैं। न्यूज एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी नेवी के कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा, 'हमारी सेना की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाए गए हैं।' यह हमला उस समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और सीजफायर लागू है।
ट्रंप का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के संदर्भ में कहा है कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को या तो नष्ट किया जाना चाहिए या अमेरिका को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि एनरिच्ड यूरेनियम को तुरंत अमेरिका को सौंपा जाए ताकि उसे नष्ट किया जा सके या फिर इसे किसी ऐसी जगह पर नष्ट किया जाए, जहां अटॉमिक एनर्जी कमीशन इसकी निगरानी कर सके।
बातचीत की स्थिति
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब कतर में चल रही बातचीत अंतिम चरण में है और अमेरिका-ईरान के बीच सहमति की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ईरान ने अपने न्यूक्लियर एनरिचमेंट कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करने के लिए सहमति नहीं दी है, जबकि अमेरिका इसी दिशा में प्रयासरत है। इस मुद्दे पर कई बार की गई बातचीत अब तक बेनतीजा रही है।