ईरान-अमेरिका तनाव: क्या खाड़ी क्षेत्र में होगा बड़ा सैन्य टकराव?
तनाव की नई परतें
नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हो रही हिंसा और अमेरिका की संभावित दखलंदाजी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। इसी संदर्भ में, ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को कड़ी चेतावनी दी है, जिसके चलते खाड़ी क्षेत्र में सैन्य सतर्कता बढ़ा दी गई है।
अमेरिकी ठिकानों पर खतरा
चेतावनी के बाद अमेरिकी ठिकानों पर खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि यदि अमेरिका ने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया, तो इसका प्रतिशोध क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किया जाएगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, तुर्की और कतर में स्थित अमेरिकी ठिकाने भी संभावित जवाबी कार्रवाई के दायरे में होंगे। इस बयान को क्षेत्रीय तनाव में वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है।
कतर एयरबेस से कर्मियों की वापसी
कतर एयरबेस से कर्मियों की आंशिक वापसी
तीन राजनयिक सूत्रों के अनुसार, कतर के अल-उदीद एयरबेस से कुछ सैन्य और गैर-सैन्य कर्मियों को हटने की सलाह दी गई है। हालांकि इसे पूर्ण निकासी नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे सुरक्षा स्तर में एहतियाती बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल बड़े पैमाने पर सैनिकों की वापसी के संकेत नहीं हैं, जैसा कि पिछले वर्ष ईरान के मिसाइल हमलों से पहले देखा गया था।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दिए कड़े बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ लगातार कड़े बयान दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दी गई या हिंसा जारी रही, तो अमेरिका "बेहद कठोर कदम" उठाएगा। एक टीवी साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि ऐसी स्थिति में ईरान को ऐसी प्रतिक्रिया देखने को मिलेगी, जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी। ट्रंप ने ईरानी जनता से विरोध जारी रखने और संस्थानों पर दबाव बनाने की अपील भी की है।
प्रदर्शनों में जनहानि
प्रदर्शनों में भारी जनहानि
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान लगभग 2,600 लोगों की जान जा चुकी है। इन प्रदर्शनों को इस्लामिक शासन के खिलाफ पिछले कई दशकों के सबसे व्यापक और तीव्र आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।
हस्तक्षेप की अटकलें
हस्तक्षेप पर बढ़ती अटकलें
एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान में हस्तक्षेप का निर्णय ले लिया है, हालांकि इसकी समय-सीमा और स्वरूप अभी स्पष्ट नहीं है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के बीच चल रही सीधी बातचीत भी फिलहाल रोक दी गई है, जिससे कूटनीतिक रास्ता और संकरा हो गया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट को मौजूदा हालात पर विस्तृत जानकारी दी गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष ईरान और इजरायल के बीच करीब 12 दिन तक चले संघर्ष में अमेरिका की भूमिका भी सामने आई थी। मौजूदा घटनाक्रम से संकेत मिल रहे हैं कि पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव के मुहाने पर खड़ा है।