ईरान-अमेरिका तनाव: युद्ध विराम के बावजूद बढ़ती जुबानी जंग
तनाव की नई परतें
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम लागू है, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच अब सीधी सैन्य टकराव के बजाय तीखी जुबानी जंग तेज हो गई है, जिससे मिडिल ईस्ट के कई देशों में चिंता बढ़ गई है। हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद, ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा। ईरान के उपराष्ट्रपति इस्माइल साघाव एस फाहानी ने सोशल मीडिया पर एक तीखा संदेश जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों ने ईरान के तेल कुओं या बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाया, तो उसका जवाब कई गुना अधिक ताकत से दिया जाएगा। उनका कहना है, "हमारा गणित अलग है। एक तेल कुआं = चार तेल कुएं।" इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि ईरान अब केवल बचाव की नहीं, बल्कि आक्रामक जवाबी कार्रवाई की रणनीति पर काम कर रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी
इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान युद्ध विराम समझौते को स्वीकार नहीं करता, तो अमेरिका उसकी तेल पाइपलाइनों को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की तेल व्यवस्था प्राकृतिक और तकनीकी कारणों से भी ध्वस्त हो सकती है, जिसे कई विशेषज्ञों ने परोक्ष धमकी के रूप में देखा। राजनैतिक मोर्चे पर भी स्थिति ठहरी हुई नजर आ रही है। अब्बास अरागची रूस के सेंट पीटर्सबर्ग पहुँच चुके हैं, जहाँ उनकी मुलाकात व्लादिमीर पुतिन से प्रस्तावित है। इससे पहले, वे पाकिस्तान और ओमान का दौरा कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर सवाल
इस बीच, ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर भी सवाल उठाए हैं। ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रजाई ने कहा कि पाकिस्तान निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाने में सक्षम नहीं है और वह अक्सर अमेरिकी हितों के अनुरूप काम करता है। ईरान को ऐसे मध्यस्थ की आवश्यकता है जो दोनों पक्षों के सामने सच्चाई रखने का साहस रखता हो।
क्षेत्रीय तनाव का विस्तार
दूसरी ओर, क्षेत्रीय तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच भी हालात बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्ध विराम उल्लंघन के आरोप लगा रहे हैं। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में अपने एक सैनिक की मौत की पुष्टि की है, जबकि हिजबुल्ला का कहना है कि उनकी कार्रवाई इजराइल के लगातार हमलों का जवाब थी।
ईरान की मिसाइल ताकत
कुल मिलाकर, भले ही युद्ध विराम कागजों पर लागू हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि तनाव चरम पर बना हुआ है। ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जो भी देश अमेरिका का साथ देगा, वह उसका दुश्मन माना जाएगा। ऐसे में क्षेत्र में अस्थिरता और बड़े संघर्ष की आशंका फिर से गहराती हुई नजर आ रही है। हाल ही में, ईरान की मिसाइल ताकत ने इजराइल की रक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी हो चुकी है। दावा किया गया है कि जहाँ इजराइल एक इंटरसेप्टर तैयार करता है, वहीं ईरान लगभग 10 बैलस्टिक मिसाइलें बना देता है।