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ईरान-अमेरिका तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते हमले और आर्थिक पाबंदियों की तैयारी

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में। हाल ही में दो टैंकरों पर ड्रोन हमले के बाद अमेरिका ने ईरान को कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। अमेरिकी रक्षा सचिव ने क्षेत्र में अपनी नौसेना की उपस्थिति बनाए रखने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन घरेलू दबाव के चलते ईरान के मुद्दे को जल्दी सुलझाना चाहता है, लेकिन हालात जटिल होते जा रहे हैं। जानें इस तनाव के पीछे की वजहें और होर्मुज जलडमरूमध्य का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।
 

तनाव की नई लहर


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच का सीजफायर अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। हाल ही में दो टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान को कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। वॉशिंगटन का उद्देश्य स्पष्ट है - तेहरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करके उसे झुकाना।


अमेरिका की नई आर्थिक पाबंदियों की योजना

अभूतपूर्व प्रतिबंधों की तैयारी


अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए रखेगी। उनका उद्देश्य ईरान की नाकेबंदी करना है। हेगसेथ ने बताया, "हम जहाजों को क्रमबद्ध तरीके से तैनात करेंगे। यदि आवश्यक हुआ, तो यह नाकेबंदी अनिश्चितकाल तक जारी रह सकती है।"


ट्रेजरी सेक्रेट्री स्कॉट बेसेंट ने भी ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगले हफ्ते ईरान पर और वित्तीय दबाव डाला जाएगा। उनका दावा है, "हम ऐसे उपाय लागू कर रहे हैं जो किसी देश के आर्थिक अलगाव के इतिहास में पहले कभी नहीं हुए।" अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने जानबूझकर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है और अब उसे जवाब देना होगा।


ट्रंप प्रशासन पर बढ़ता दबाव

ट्रंप सरकार पर अंदरूनी दबाव


राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घरेलू मोर्चे पर भी दबाव में हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि से उनकी लोकप्रियता प्रभावित हो रही है। नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों में महंगाई बढ़ने पर कांग्रेस में रिपब्लिकन का प्रभाव कमजोर हो सकता है।


इसलिए ट्रंप प्रशासन ईरान के मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाना चाहता है। लेकिन वास्तविकता यह है कि युद्ध के बाद का सीजफायर कई बार टूट चुका है। एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है।


हमले की घटनाएं

UAE के टैंकरों पर ड्रोन हमला


गुरुवार की शाम, होर्मुज जलडमरूमध्य में अबू धाबी की सरकारी तेल कंपनी ADNOC के दो टैंकरों पर ड्रोन से हमला हुआ। संयुक्त अरब अमीरात ने इस हमले का आरोप ईरान पर लगाया।


यूएई ने कहा कि हमले में कोई घायल नहीं हुआ और स्थिति नियंत्रण में है। ब्रिटेन के UKMTO ने भी पुष्टि की कि जलडमरूमध्य में दो जहाजों को मामूली नुकसान पहुंचा है, हालांकि उसने जहाजों के नाम का खुलासा नहीं किया। यूएई के विदेश मंत्रालय ने इसे "समुद्री डकैती" करार दिया।


मंत्रालय ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज का उपयोग आर्थिक दबाव के लिए करना ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की गतिविधि है। यह यूएन के नौवहन स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा है। ईरान की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।


होर्मुज का महत्व

क्यों अहम है होर्मुज?


फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला होर्मुज दुनिया के 20% तेल का मार्ग है। यहां छोटी सी भी गड़बड़ी से वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। अमेरिका की नई नाकेबंदी और होर्मुज में बढ़ते हमलों से यह स्पष्ट है कि सीजफायर के बावजूद दोनों देश पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र के लिए और भी कठिनाइयाँ आ सकती हैं।