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ईरान-अमेरिका वार्ता में असफलता: शांति प्रयासों को झटका

ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता असफल रही, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। इस्लामाबाद में हुई बातचीत में अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की मांग की, जबकि ईरान ने इन शर्तों को खारिज कर दिया। वार्ता के विफल होने के बाद, क्षेत्र में युद्ध की आशंका गहरा गई है। जानें इस वार्ता के दौरान क्या हुआ और आगे की स्थिति क्या होगी।
 

शांति प्रयासों को झटका

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में हुई पहली दौर की बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। यह मैराथन बैठक लगभग 21 घंटे तक चली, जिसके बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि वार्ता सफल नहीं रही, और इसके लिए उन्होंने ईरान के कठोर रुख को जिम्मेदार ठहराया।


वार्ता के दौरान क्या हुआ?

शनिवार को शुरू हुई यह चर्चा लगभग 15 घंटे तक चली। जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी चर्चा के बावजूद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहे। उन्होंने कहा, 'बुरी खबर यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके क्योंकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल हमारी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था।'


मुख्य मुद्दे

अमेरिका की प्रमुख मांग यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद करे। ट्रंप का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका वह सब कुछ बातचीत के माध्यम से हासिल करना चाहता है जो वह युद्ध से नहीं जीत सका।


ईरान की शर्तें

ईरान ने अपनी शर्तों को स्पष्ट और कठोर रखा है। ईरान की मांग है कि अमेरिका उस पर कोई हमला न करे और अपनी आक्रामकता को पूरी तरह से समाप्त करे। इसके अलावा, वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और यूरेनियम संवर्धन का अधिकार भी अपने पास रखना चाहता है। ईरान ने यह भी कहा है कि अमेरिका सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाए और युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे की मांग की है।


अमेरिका की प्रमुख मांगें

इस वार्ता के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं। पहली मांग थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद करे। दूसरी शर्त के तहत अमेरिका चाहता था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सामान्य बनाया जाए। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी रहेगा।


आगे की स्थिति

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि यह बातचीत 40 दिनों के युद्ध के बाद उत्पन्न अविश्वास के माहौल में हुई थी, इसलिए एक बार में समझौते की उम्मीद नहीं थी। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और जेडी वेंस अमेरिका लौट रहे हैं। वार्ता के विफल होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने और युद्ध की संभावना गहरा गई है।