ईरान-अमेरिका संघर्ष: ट्रंप की चिंता और हथियारों की कमी
संघर्ष का पांचवां दिन
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध अब अपने पांचवे दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें दोनों पक्षों ने 5,000 से अधिक मिसाइलें दागी हैं। इस बीच, अमेरिका ने हथियार निर्माण कंपनियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है, जिसमें यह बताया गया है कि अमेरिका के पास हथियारों की कमी हो रही है। यदि यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो इसके परिणाम क्या होंगे? ट्रंप अब हथियार उत्पादन करने वाली कंपनियों के साथ बैठक करने की योजना बना रहे हैं। ईरान के साथ युद्ध ट्रंप के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की धड़कनें बढ़ गई हैं, क्योंकि पिछले 24 घंटों में लगभग ₹6,900 करोड़ खर्च हो चुके हैं। ईरान पर हमले की तैयारी में पहले ही ₹5,500 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो यह खर्च ₹18 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है। हालांकि, ट्रंप के लिए पैसे की कमी एक बड़ी समस्या नहीं है, बल्कि समस्या युद्ध के लिए आवश्यक हथियारों और मिसाइलों की कमी है।
हथियारों की कमी का सामना
अमेरिका की यह ताकत अब उसकी कमजोरी बनती जा रही है। अमेरिका, जो खुद को विश्व का सबसे शक्तिशाली देश मानता है, अब मुश्किल में है। यदि युद्ध लंबा चलता है, तो अमेरिका को हथियारों की कमी का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के पास केवल 10 दिनों के लिए लड़ने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और मिसाइलें हैं। पेंटागन की एक गुप्त रिपोर्ट में हथियारों की कमी का खुलासा होने के बाद ट्रंप चिंतित हो गए हैं। हथियारों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए, ट्रंप ने रक्षा कंपनियों के अधिकारियों की एक बैठक 6 मार्च को वाइट हाउस में बुलाई है। इस बैठक में ट्रंप इस पर चर्चा करेंगे कि हथियारों के उत्पादन में कैसे तेजी लाई जाए। ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए अमेरिका के पास सीमित संसाधन हैं।
ईरान का जवाब
ईरान जिस तरह से अमेरिका और इजराइल के हमलों का जवाब दे रहा है, वह चिंता का विषय है। ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ट्रंप की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका का सबसे उन्नत इंटरसेप्टर थार की 25% कमी हो गई है। जहाजों पर तैनात रडारों की भी कमी देखी जा रही है, और GPS गाइडेड किट पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है। ईरान के द्वारा अमेरिका के दूतावासों को निशाना बनाना और चुन-चुनकर हमला करना ट्रंप के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।