ईरान-इजरायल संघर्ष: इजरायली जनता की राय और अमेरिका की भूमिका
ईरान की शक्ति का उभार
अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने कई पूर्वाग्रहों को तोड़ दिया है, जिसमें सबसे प्रमुख यह है कि ईरान एक कमजोर राष्ट्र है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष के बाद, ईरान एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरा है। अमेरिका के साथ 60 दिनों का अंतरिम समझौता तेहरान की शर्तों पर हुआ है। लेबनान में ईरान की असहमति के चलते, अमेरिका इजरायल पर दबाव बढ़ा रहा है। हाल ही में, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपनी सेना को लेबनान में हमले रोकने का निर्देश दिया है।
सर्वेक्षण के परिणाम
एक हालिया सर्वेक्षण ने इजरायल और अमेरिका की वास्तविकता को उजागर किया है, जिसे दोनों देश सामने लाने से कतराते हैं। इस सर्वे में पाया गया कि 92.1 प्रतिशत इजरायली नागरिक मानते हैं कि ईरान ने इस युद्ध में जीत हासिल की है। इसके अलावा, 82.9 प्रतिशत का मानना है कि इस अभियान ने इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा को कमजोर किया है। यह सर्वे यरूशलेम स्थित हिब्रू विश्वविद्यालय और अगम इंस्टीट्यूट द्वारा 17 से 20 जून के बीच किया गया था, जिसमें लगभग 3,644 लोगों ने भाग लिया।
जनता की राय और नेतन्याहू का दावा
सर्वेक्षण के अनुसार, 63.2 प्रतिशत इजरायली नागरिक अमेरिका-ईरान समझौते का विरोध करते हैं, जबकि केवल 12.1 प्रतिशत इसका समर्थन करते हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि इजरायल ने कई लक्ष्यों को प्राप्त किया है और अस्तित्वगत खतरे को समाप्त किया है। हालांकि, 72.5 प्रतिशत इजरायली उनके इस दावे पर विश्वास नहीं करते हैं। 87.8 प्रतिशत का मानना है कि इजरायल युद्ध में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में असफल रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप का दबाव
डोनाल्ड ट्रंप इजरायल पर लेबनान में बमबारी रोकने का दबाव बना रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि इजरायल ने बमबारी जारी रखी, तो ईरान के साथ समझौता संकट में पड़ सकता है। हालांकि, सर्वे में 48.2 प्रतिशत इजरायली नागरिकों का मानना है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई की जानी चाहिए, भले ही इससे ट्रंप नाराज हो जाएं।