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ईरान-इजरायल संघर्ष: क्या पिकैक्स माउंटेन बनेगा युद्ध का निर्णायक मोड़?

मध्य-पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। अमेरिका की संभावित भूमिका और पिकैक्स माउंटेन में छिपे संवर्धित यूरेनियम के भंडार के बारे में जानें। क्या यह ठिकाना युद्ध का निर्णायक मोड़ बनेगा? जानिए इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
 

मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव


मध्य-पूर्व में जारी युद्ध अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष का आज 14वां दिन है, जिसमें दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अमेरिका भी इस टकराव में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। इजरायल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जबकि ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं।


इजरायल के हवाई हमले

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली लड़ाकू विमानों ने ईरान के 200 से अधिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिनका उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। इस बीच, अमेरिका पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह इस युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।


अमेरिका की रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिक चिंता ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। इसी उद्देश्य से अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए भारी बमों का उपयोग करने की योजना बनाई है। यह भी कहा जा रहा है कि इन हमलों के लिए ब्रिटेन की जमीन का उपयोग किया जा सकता है।


ब्रिटेन में बमवर्षक विमानों की तैनाती

अमेरिका ने अपने तीन B-1B लांसर बमवर्षक विमानों को ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस पर तैनात कर दिया है। ये विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने और भारी पारंपरिक हथियार ले जाने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला करता है, तो यह मिशन इसी एयरबेस से शुरू हो सकता है।


पिकैक्स माउंटेन का रहस्य

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने अपने 900 पाउंड से अधिक संवर्धित यूरेनियम को पिकैक्स माउंटेन नामक गहरे भूमिगत ठिकाने में छिपा रखा है। यह स्थान ईरान के नतान्ज़ परमाणु केंद्र के निकट ज़ाग्रोस पर्वत श्रृंखला में स्थित है।


यह सुविधा एक ग्रेनाइट पहाड़ के नीचे बनाई गई है और इसकी गहराई काफी अधिक है। इसे स्थानीय रूप से कुह-ए कोलांग गाज़ के नाम से भी जाना जाता है। यहां कई सुरंगें और निर्माण गतिविधियां देखी गई हैं, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि यहां यूरेनियम संवर्धन का कार्य चल रहा है।


गुप्त सुविधा की गहराई

यह स्थल नतान्ज़ परमाणु केंद्र से लगभग 1.6 किलोमीटर की दूरी पर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह सुविधा जमीन के करीब 100 मीटर या उससे अधिक गहराई में हो सकती है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, यह बंकर लगभग 330 फीट नीचे स्थित है, जो ईरान के फोर्डो यूरेनियम संयंत्र से भी गहरा है।


संवर्धित यूरेनियम का भंडार

पिछले साल के संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। उस समय ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी हद तक समाप्त हो गया है। लेकिन बाद में पता चला कि ईरान ने अपने कार्यक्रम को फिर से सक्रिय कर लिया है।


अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान के पास अभी भी 60 प्रतिशत तक संवर्धित लगभग 900 पाउंड यूरेनियम मौजूद है, जो कई परमाणु हथियार बनाने के लिए पर्याप्त है।


युद्ध का संभावित मोड़

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अमेरिका और इजरायल पिकैक्स माउंटेन जैसे सुरक्षित परमाणु ठिकानों को निष्क्रिय नहीं करते, तब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं होगा। इस कारण, यह स्थान इस युद्ध में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।