ईरान-इजरायल संघर्ष: क्या है इजरायल की चुप्पी के पीछे की रणनीति?
संघर्ष की वर्तमान स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को 11 दिन हो चुके हैं, लेकिन इजरायल ने अभी तक इस ताजा संघर्ष से दूरी बनाए रखी है। ईरान कुवैत, कतर, बहरीन और जॉर्डन पर हमले कर रहा है, लेकिन इजरायल को निशाना बनाने से बच रहा है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया गया है कि इजरायल तीसरे हमले की तैयारी कर रहा है। पिछले हमले में ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया था, जिससे कई शहरों में भारी तबाही हुई थी।
इजरायल की रणनीति क्या है?
ईरान की सेना और आईआरजीसी जॉर्डन को लगातार निशाना बना रहे हैं, लेकिन इजरायल पर कोई हमला नहीं किया गया है। इजरायल अभी तक युद्ध में तटस्थ बना हुआ है, लेकिन ईरान की गतिविधियों पर उसकी नजर है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक सुरक्षा बैठक बुलाई, जिसमें बताया गया कि ईरान इजरायल को युद्ध में खींचने की योजना बना रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल एक सुसंगत रणनीति के तहत काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य इजरायल को संघर्ष से दूर रखना है। यदि अमेरिका ईरान के हमलों का जवाब देता है, तो इसका प्रभाव इजरायल पर नहीं पड़ेगा, बल्कि खाड़ी देशों पर पड़ेगा।
ईरान हमले से क्यों बच रहा है?
यदि इजरायल युद्ध में तटस्थ है, तो सवाल यह है कि ईरान उस पर हमला क्यों नहीं कर रहा? कतर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अब्दुल्ला बंदर अल-ओतैबी के अनुसार, इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट से अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों का संचालन हो रहा है, लेकिन ईरान इन विमानों को निशाना बनाने से बच रहा है। इसका कारण यह है कि तेहरान संघर्ष को और बढ़ाना नहीं चाहता।
इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज के शोधकर्ता बेनी सबती का कहना है कि ईरान इजरायल पर प्रत्यक्ष हमले से इसलिए बच रहा है, क्योंकि उसे डर है कि इजरायल उसके महत्वपूर्ण संस्थानों और नेताओं पर हमला कर सकता है।
इजरायल की खुफिया घुसपैठ
ईरान के भीतर इजरायल की खुफिया गतिविधियाँ व्यापक हैं। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान इस बात से भलीभांति वाकिफ है कि इजरायल क्या कर सकता है। पिछले दो युद्धों में इजरायल ने कई ईरानी नेताओं को निशाना बनाया था, जो अमेरिका द्वारा नहीं किया गया।