ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: ट्रंप के दावों का ईरान ने किया खंडन
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष ने अब केवल मिसाइलों की लड़ाई नहीं, बल्कि दावों और सच्चाई की जंग का रूप ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया है कि ईरान कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है, जिसमें ईरान ने न्यूक्लियर हथियारों पर रोक लगाने पर सहमति जताई है। इसी के चलते अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले को 5 दिनों के लिए रोकने का निर्णय लिया है। लेकिन ईरान का जवाब इसके विपरीत है, जिसमें कहा गया है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है।
ट्रंप के दावों का खंडन
हाल ही में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों ने एक बार फिर से वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच अत्यधिक उत्पादक बातचीत हुई है। उनका प्रशासन यह मानता है कि वे ईरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने ईरानी पावर प्लांटों पर हमलों को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्री ने ट्रंप के दावों को मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा बताया है। ईरान का कहना है कि जब तक इजराइल अपनी आक्रामकता नहीं रोकता, तब तक किसी भी प्रकार की सीधी वार्ता संभव नहीं है।
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम
ट्रंप का दावा पूरी तरह से भ्रामक है, और ईरान का कहना है कि जब तक इजराइल हमले नहीं रोकता, तब तक बातचीत का कोई सवाल नहीं उठता। ईरान का कहना है कि उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम केवल बिजली उत्पादन और चिकित्सा उपयोग के लिए है। लेकिन अमेरिका और इजराइल का आरोप है कि ईरान ने 90% तक यूरेनियम समृद्ध कर लिया है और वह कभी भी परमाणु बम बना सकता है। यह विवाद नया नहीं है; 2015 में जॉइंट कॉम्प्रहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन के तहत एक समझौता हुआ था, जिसमें ईरान ने सीमित न्यूक्लियर गतिविधियों पर सहमति दी थी। लेकिन 2018 में ट्रंप ने इस डील से अमेरिका को बाहर कर लिया, जिसके बाद तनाव फिर से बढ़ गया।
वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव
इस संकट का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है, क्योंकि दुनिया की 20% तेल सप्लाई इसी स्टेट ऑफ हॉर्मोस से गुजरती है। ट्रंप के बयान के बाद तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन जब ईरान ने अपने दावों का खंडन किया, तो कीमतें फिर से बढ़ गईं। इससे भारत जैसे देशों में महंगाई और ईंधन की कीमतों का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के दावों के पीछे तीन मुख्य कारण हैं: पहला, कूटनीतिक दबाव डालना ताकि ईरान को बातचीत के लिए मजबूर किया जा सके; दूसरा, सैन्य रणनीति के तहत समय हासिल करना; और तीसरा, आर्थिक संकेत देना ताकि तेल और बाजार को स्थिर किया जा सके।