ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव: क्या यूरोप भी होगा निशाना?
नई दिल्ली में बढ़ते तनाव की स्थिति
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच का तनाव अब एक नए स्तर पर पहुंच सकता है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि डोनाल्ड ट्रंप युद्ध को बढ़ाते हैं, तो ईरान अमेरिका के यूरोपीय सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकता है। तेहरान अब 'छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं' की नीति पर चल रहा है।
युद्ध का दायरा बढ़ाने की योजना
अब तक ईरान ने अमेरिकी हमलों का जवाब केवल मध्य पूर्व तक सीमित रखा था, जैसे दुबई और कुवैत। लेकिन अब तेहरान लड़ाई के दायरे को बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
रिपोर्ट में ईरानी सरकार के दो सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरानी सेना ने दक्षिण-पूर्वी यूरोप में अमेरिकी ठिकानों पर हमले की योजना बनाई है, जिसमें बुल्गारिया का नाम भी शामिल है। बुल्गारिया ने हाल ही में अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के लिए अपने बेजमर एयर बेस का उपयोग करने की अनुमति दी थी।
साइप्रस भी संभावित लक्ष्य माना जा रहा है, जहां मार्च में एक ब्रिटिश एयरबेस पर ड्रोन हमला हुआ था। एक सूत्र ने कहा, 'अगर अमेरिका बहुत आगे बढ़ा, तो ईरान किसी भी कीमत पर अपनी रक्षा करेगा और यूरोप पर भी हमला करेगा।'
होर्मुज स्ट्रेट पर नजर
ईरानी सेना होर्मुज स्ट्रेट में समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक केबल को निशाना बनाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग मार्गों में से एक है।
सूत्रों के अनुसार, यदि ट्रंप ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकियों पर कायम रहते हैं, तो तेहरान लड़ाई बढ़ाने के सभी विकल्प तैयार रखेगा। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी सैन्य ठिकाने को लक्ष्य बनाया जाएगा।
बातचीत ठप, तनाव बढ़ता जा रहा है
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने पर बातचीत ठप हो गई है। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच दोबारा बातचीत की उम्मीदें भी कम हो गई हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान के साथ न तो कोई बातचीत हो रही है और न ही कोई योजना है।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों तक मार करने में सक्षम मिसाइलें हैं। ऐसे में यदि तनाव और बढ़ता है, तो यूरोप भी इस संघर्ष की चपेट में आ सकता है।
इस समय पूरा मध्य पूर्व हाई अलर्ट पर है। अमेरिका और ईरान दोनों की तरफ से बयानबाजी तेज हो गई है, और किसी भी छोटी घटना से बड़ा युद्ध भड़कने का खतरा बना हुआ है।