ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव: नौसेना की तैयारियों का ऐलान
ईरान की नौसेना की चेतावनी
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। ईरान की नौसेना ने अमेरिकी बलों को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनकी सशस्त्र सेनाएं किसी भी संभावित हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उनकी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के लिए मिसाइल इकाइयां, ड्रोन और विशेष कमांडो तैनात हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश पर हमला करने वाले दुश्मन को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
कमांडर की चेतावनी
ईरान की उत्तरी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल मोहसेन रजाकी ने अस्तारा में एक कार्यक्रम के दौरान यह चेतावनी दी। सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि ईरान की सशस्त्र सेनाओं के बीच तालमेल इस समय अपने उच्चतम स्तर पर है। नौसेना के जवान दिन-रात देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा में जुटे हुए हैं।
सैन्य रणनीति
रजाकी ने बताया कि नौसेना की सबसे बड़ी ताकत उसके जवान हैं। उन्होंने कहा कि मिसाइल और ड्रोन इकाइयों के साथ विशेष कमांडो भी समुद्री क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। उनका मानना है कि ईरान के खिलाफ किसी भी हमले की कीमत इतनी अधिक होनी चाहिए कि दुश्मन दोबारा ऐसा करने की हिम्मत न करे।
सुरक्षा परिषद की चेतावनी
ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी हाल के दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दे रहे हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने सोशल मीडिया पर कहा था कि यदि युद्ध शुरू हुआ, तो इसका परिणाम विनाशकारी होगा।
अमेरिका की नई रणनीति
अक्टूबर के अंत में ईरान के सर्वोच्च नेता ने सेना को अधिकतम तैयारी रखने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि यदि देश पर फिर से हमला होता है, तो बिना किसी भौगोलिक सीमा के तुरंत और प्रभावी जवाब दिया जाए। यह निर्देश सेना को खतरों से निपटने के लिए तैयार रहने और संभावित सैन्य ठिकानों की सूची को अपडेट करने के लिए भी था।
अमेरिका की निगरानी बढ़ाना
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका ने भी उसके खिलाफ निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने का निर्णय लिया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने एक नई विशेष टीम, टास्क फोर्स आयरन गेट, बनाने की घोषणा की है। इस टीम का मुख्य कार्य ईरान के कथित जमीनी रास्तों को रोकना है, जिनसे हथियार और सैन्य तकनीक दूसरे देशों तक पहुंचाई जाती है।
ईरान की सुरक्षा चिंताएं
अमेरिका लंबे समय से ईरान के मिसाइल और ड्रोन कार्यक्रमों पर रोक लगाने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान इसे अपनी सुरक्षा का आवश्यक हिस्सा मानता है। इस प्रकार, अमेरिका ईरान की सैन्य आपूर्ति पर नियंत्रण करने की योजना बना रहा है, जबकि तेहरान अपनी सैन्य ताकत और जवाबी कार्रवाई की क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहा है। इससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की संभावना है।