ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष: पाकिस्तान की मध्यस्थता प्रयासों को झटका
संघर्ष की स्थिति
पिछले पांच हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे गंभीर संघर्ष को रोकने के प्रयासों को एक बड़ा कूटनीतिक झटका लगा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित बैठक में भाग लेने से मना कर दिया है। तेहरान का कहना है कि वाशिंगटन द्वारा रखी गई शर्तें पूरी तरह से 'अस्वीकार्य' हैं।
मध्यस्थता की कोशिशें
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान सहित क्षेत्रीय देशों की अगुवाई में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष-विराम की मध्यस्थता की कोशिशें अब ठप हो गई हैं। तनाव कम करने के लिए की जा रही कूटनीतिक कोशिशों को इस झटके ने प्रभावित किया है। ईरान ने मध्यस्थों को सूचित किया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मिलने के लिए तैयार नहीं है।
पाकिस्तान की भूमिका
यह इनकार उस समय आया है जब क्षेत्रीय मध्यस्थ दोनों पक्षों को बातचीत की मेज़ पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस्लामाबाद ने पहले कहा था कि वह बातचीत को संभव बनाने के लिए तैयार है। विदेश मंत्री इशाक डार ने इस पर गर्व महसूस करने की बात कही थी।
अमेरिका की स्थिति
अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी संकेत दिया था कि वाशिंगटन ईरान के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कोई विशेष जानकारी साझा नहीं की। ईरान ने पहले ही यह दावा खारिज कर दिया था कि वह पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली बातचीत में भाग ले रहा है।
कूटनीतिक अनिश्चितता
मुंबई में अपने महावाणिज्य दूतावास द्वारा जारी बयान में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है। ईरान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के मंच पर उनकी कोई भागीदारी नहीं है। इसके अलावा, ईरान को ट्रंप प्रशासन से 15-सूत्रीय प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने 'अत्यधिक और अवास्तविक' बताया।
भविष्य की संभावनाएं
इन टिप्पणियों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों के बीच संभावित बातचीत की संभावना अभी भी अस्पष्ट बनी हुई है।