ईरान और अमेरिका के बीच सीज फायर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नया नक्शा
सीज फायर और नया नक्शा
8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए युद्धविराम हुआ। इस समझौते की एक शर्त थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मोस में जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया जाएगा। हालांकि, इस शर्त का वास्तविक प्रभाव सीमित नजर आ रहा है। मार्ग खुलने के बावजूद जहाजों का आवागमन काफी धीमा है। इस सीज फायर के बाद, ईरानी मीडिया ने एक नया नक्शा जारी किया है, जिसे आईआरजीसी द्वारा अनुमोदित मार्ग बताया गया है। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि पुराने मार्ग में समुद्री सुरंगें हो सकती हैं, इसलिए जहाजों को नए मार्ग से गुजरने की सलाह दी गई है। यह नया मार्ग ईरान के तट के निकट लारक आइलैंड के पास से होकर गुजरता है। हालाँकि, जहाजों का आवागमन अब भी बहुत कम है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी में प्रवेश का एकमात्र समुद्री मार्ग है, जो ईरान को ओमान और संयुक्त अरब अमीरात से अलग करता है। यह जलमार्ग ओमान की खाड़ी और हिंद महासागर को जोड़ता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, वैश्विक तेल खपत का लगभग 20 प्रतिशत इस जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जिसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन चोकपॉइंट माना जाता है। ईरान इस जलमार्ग पर अपने नियंत्रण को बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका ने स्थायी शांति के लिए बातचीत की पेशकश की है।
ईरान की कार्रवाइयाँ
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने युद्ध की शुरुआत में इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था, जिसके बाद यहाँ से बहुत कम जहाज गुजरे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए एक जहाज को $2 मिलियन का भुगतान किया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान अब शिपिंग कंपनियों से अपने तेल टैंकरों को होर्मुज़ से गुजरने के लिए क्रिप्टोकरेंसी में शुल्क मांगने की योजना बना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और शुल्क
संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (UNCLOS) के अनुसार, जलडमरूमध्य से सटे देश वहाँ से गुजरने के लिए किसी भी प्रकार का भुगतान नहीं मांग सकते। हालाँकि, वे जहाजों को कुछ विशेष सेवाओं के लिए सीमित शुल्क लगा सकते हैं। प्राकृतिक जलमार्गों पर आमतौर पर कोई शुल्क नहीं होता, जबकि मानव निर्मित नहरों पर शुल्क लिया जाता है।
पड़ोसी देशों पर प्रभाव
रिपोर्टों के अनुसार, जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए शुल्क मांगने का यह कदम पहले कभी नहीं उठाया गया। खाड़ी के देश, जो ऊर्जा निर्यात पर निर्भर हैं, इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। यूएई ने कहा है कि इस जलमार्ग को किसी भी देश द्वारा बंधक नहीं बनाया जा सकता। कतर के विदेश मंत्रालय ने भी स्वतंत्र आवाजाही के अधिकार की बात की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस जलमार्ग पर तेल की स्वतंत्र आवाजाही को शांति-समझौते का हिस्सा बनाने की मांग की है।