ईरान और ओमान के बीच नए शिपिंग मॉडल पर सहमति, अमेरिका की चिंताएँ बढ़ीं
मिडिल ईस्ट में तनाव और नया शिपिंग मॉडल
कुछ हफ्ते पहले, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता का माहौल बना दिया था। ईरानी परमाणु स्थलों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने मिसाइल कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप स्टेट ऑफ होर्मुज, जो कि एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, बंद हो गया। इससे वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई, जिससे लाखों बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई। कई वाणिज्यिक जहाजों ने अपने मार्ग बदल दिए, और यह आशंका जताई जाने लगी कि यदि यह संकट जारी रहा, तो ऊर्जा बाजार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। अब, इसी हुरमूस के संदर्भ में एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। ईरान और ओमान ने स्टेट ऑफ हुरमूस के लिए एक नए शिपिंग मॉडल पर सहमति बना ली है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देशों के बीच नए समुद्री कॉरिडोर के भौगोलिक निर्देशांक पर सहमति बन चुकी है और अब संयुक्त बयान को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
बातचीत के अंतिम चरण में
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता स्माइल बगई ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम गरीबादी ने बताया कि वार्ता बुनियादी समझौतों तक पहुँच चुकी है और प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक जहाजों का मुख्य मार्ग ईरान के समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेगा, जिससे तेहरान को इन जहाजों की निगरानी का अधिकार मिलेगा। वर्तमान व्यवस्था में जहाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिपिंग लेन का उपयोग करते हैं और उन्हें ईरान या ओमान से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती। नए मॉडल के तहत मौजूदा अस्थाई शिपिंग लेनों को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा।
समझौते का ड्राफ्ट तैयार
दो क्षेत्रीय अधिकारियों ने बताया कि ईरान और ओमान के वार्ताकारों ने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए समझौते का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और वे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई की अंतिम मंजूरी का इंतज़ार कर रहे हैं। माना जाता है कि युद्ध की शुरुआती कार्रवाई में खामेनेई घायल हो गए थे और तब से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि यह संभावित समझौता जलडमरूमध्य के विवाद का एक अस्थायी समाधान हो सकता है। इससे अमेरिका और ईरान के लिए तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने का रास्ता साफ होगा।