ईरान और यूएई के बीच बढ़ते तनाव के बीच व्यापारिक संबंधों पर असर
ईरान पर हमले के बाद की स्थिति
28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। इसके कुछ घंटों बाद, ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसमें लगभग 83 प्रतिशत मिसाइल और ड्रोन हमले खाड़ी सहयोग परिषद के देशों पर किए गए। इनमें से कुछ हमले सऊदी अरब पर भी हुए। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने सऊदी समकक्ष से बातचीत में कहा कि इन हमलों का ईरान से कोई संबंध नहीं है। यूएई ने सबसे अधिक ईरानी हमलों का सामना किया, लेकिन ईरान ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया।
यूएई की भौगोलिक स्थिति और ईरान का दृष्टिकोण
यूएई को ईरान के निकटता और राजनयिक संबंधों के कारण सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। ईरान की तटरेखा यूएई के करीब है, और यूएई इजरायल के साथ अच्छे संबंध रखता है। यह खाड़ी का एकमात्र देश है जिसने इजरायल को मान्यता दी है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि युद्ध के दौरान इजरायल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम यूएई में तैनात किए थे, जो ईरान को पसंद नहीं आया।
ईरान का उद्देश्य और यूएई की प्रतिक्रिया
ईरान का मानना है कि वह वैश्विक व्यापारिक केंद्र पर हमला करके दुनिया में आतंक फैलाना चाहता है। हाल ही में, एक रिपोर्ट में कहा गया कि ईरानी अधिकारियों ने सऊदी अरब को बताया था कि वे यूएई को कमजोर करने की योजना बना रहे हैं। यूएई का प्रशासन अब ईरान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग कर रहा है। पहले धैर्य दिखाने के बाद, यूएई ने अब ईरान के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है।
यूएई की कूटनीतिक गतिविधियाँ
जंग शुरू होने के अगले दिन, यूएई ने ईरान में अपने दूतावास को बंद कर दिया और सभी कर्मचारियों को वापस बुला लिया। इसके अलावा, यूएई ने ईरानी सांस्कृतिक केंद्रों और स्कूलों को भी बंद कर दिया। यूएई ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य सहयोग देने की भी बात की। ईरान ने आरोप लगाया है कि यूएई की धरती से उसके सैन्य ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं, लेकिन यूएई ने इन दावों का खंडन किया है।
व्यापारिक संबंधों पर प्रभाव
हालांकि ईरान यूएई पर हमले कर रहा है, लेकिन यूएई ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बना हुआ है। मौजूदा युद्ध ने दोनों देशों के संबंधों को तनाव में डाल दिया है। ईरानी नागरिकों को यूएई से निकलने के लिए सीमित समय दिया गया है, और उन्हें अपनी संपत्ति का प्रबंधन करने में कठिनाई हो रही है।
भविष्य की संभावनाएँ
चीन के बाद, यूएई ईरान का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जेबेल अली बंदरगाह ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक केंद्र है, लेकिन अब ईरान से जुड़े निर्यात ऑर्डर भी रद्द किए जा रहे हैं। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि यूएई के साथ उनके संबंध अब सामान्य नहीं रहेंगे, और वे पाकिस्तान के बंदरगाहों और कतर के हमाद पोर्ट को विकल्प के रूप में देख रहे हैं।