ईरान का इजरायल पर मिसाइल हमला: दिमोना में हाइपरसोनिक मिसाइलों की दस्तक
तेहरान से इजरायल की ओर मिसाइलों की बौछार
तेहरान: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के सबसे सुरक्षित शहर दिमोना तक पहुंच गई हैं। यह घटना शनिवार रात को हुई, जब ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के चौथे चरण के तहत इजरायल के विभिन्न शहरों पर एक साथ हमला किया। दुनिया की अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों, जैसे आयरन डोम, एरो और डेविड स्लिंग के बावजूद, ईरानी मिसाइलें दिमोना तक पहुंच गईं, जहां इजरायल का प्रमुख परमाणु अनुसंधान केंद्र स्थित है।
ईरानी गार्ड का दावा
ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इस हमले में हाइपरसोनिक फत्ताह, कद्र और एमाद बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। IRGC का दावा है कि इजरायल की हवाई सुरक्षा अब कमजोर हो रही है और युद्ध के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस हमले में इजरायल के पांच शहरों को निशाना बनाया गया, साथ ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए।
हमले में शामिल मिसाइलें और ड्रोन
हमले में इस्तेमाल की गई प्रमुख मिसाइलें:
- फत्ताह: हाइपरसोनिक मिसाइल, जिसे रोकना लगभग असंभव है।
- कद्र और एमाद: लंबी दूरी की सटीक बैलिस्टिक मिसाइलें।
- हमलावर ड्रोन: हमले में शामिल अन्य उपकरण।
निशाने पर इजरायल के शहर
ईरान ने इस हमले में निम्नलिखित इजरायली शहरों को लक्ष्य बनाया:
- दिमोना
- बेर शेवा
- ईलात
- अराद
- किर्यात गत
IRGC का दावा है कि दिमोना में मिसाइलें पहुंचीं और कई लोग मारे गए। IRGC ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बार निशाना केवल इजरायल तक सीमित नहीं था, बल्कि अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिनमें कुवैत का अली अल-सलेम एयरबेस और यूएई के अल-मिनहाद और अल-धफरा एयरबेस शामिल हैं।
घायलों की संख्या पर विवाद
ईरान का दावा है कि हमले में 200 से अधिक लोग मारे गए, जिसमें दिमोना में दर्जनों मौतें शामिल हैं। हालांकि, इजरायल का आधिकारिक बयान केवल 50 घायलों का है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह 28 फरवरी के बाद इजरायल के नागरिकों के लिए सबसे कठिन रात थी। दिमोना में मिसाइल गिरने के बाद, कई एंबुलेंस और सैन्य हेलिकॉप्टर घायलों को ले जाने के लिए रवाना हुए, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या घायलों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है।
इजरायल पर दबाव का आरोप
IRGC का आरोप: इजरायल ने पत्रकारों और गवाहों पर दबाव डालकर असली नुकसान की जानकारी को बाहर आने से रोका है।
हिजबुल्लाह का समर्थन
उत्तर से लेबनान का हिजबुल्लाह भी इस संघर्ष में सक्रिय है। IRGC ने हिजबुल्लाह की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने इजरायल के उत्तरी और मध्य हिस्सों पर भारी दबाव बनाए रखा है। इस प्रकार, इजरायल को एक साथ दो मोर्चों पर लड़ना पड़ रहा है, जहां दक्षिण से ईरानी मिसाइलें और उत्तर से हिजबुल्लाह के हमले हो रहे हैं।
IRGC का बड़ा दावा
IRGC का दावा: युद्ध के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। उनका कहना है कि इजरायल की हवाई सुरक्षा, जो पहले दुनिया की सबसे मजबूत मानी जाती थी, अब टूट रही है और इतने बड़े पैमाने पर हमलों को रोकना उसके लिए संभव नहीं रहा।