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ईरान का ऐतिहासिक सफर: साम्राज्य से इस्लाम तक

इस लेख में ईरान के ऐतिहासिक सफर का वर्णन किया गया है, जिसमें सिकंदर का साम्राज्य पर आक्रमण, सायरस का उदार शासन और इस्लाम का आगमन शामिल है। जानें कैसे फारसी साम्राज्य का उत्थान और पतन हुआ, और किस प्रकार यह क्षेत्र विभिन्न साम्राज्यों के प्रभाव में आया। यह जानकारी आपको ईरान के समृद्ध इतिहास की एक झलक प्रदान करेगी।
 

सिकंदर और फारसी साम्राज्य का पतन

युद्ध के मैदान में सिकंदर खड़ा है, जहाँ एक रथ पर एक लाश पड़ी है। यह लाश उस राजा की है, जिसने धरती पर सबसे बड़ा साम्राज्य स्थापित किया था। सिकंदर अपने दुश्मन की मृत्यु से दुखी था और उसे जीवित पकड़ने की इच्छा रखता था। निराशा में, वह राजा के मृत शरीर के पास जाता है और उसकी अंगूठी अपने अंगूठे में पहन लेता है। इस प्रकार, मिसिडोनिया का सिकंदर पर्शिया का सुलतान बन जाता है। जब उसने पर्शिया पर आक्रमण किया, तब वहां डेरियस III का शासन था। उसकी जीत के बाद, फारसी साम्राज्य का पतन हुआ और सिकंदर ने एक विशाल साम्राज्य पर शासन करना शुरू किया।


ईरान का प्राचीन इतिहास

ईरान को पहले पर्शिया या फारस के नाम से जाना जाता था। लगभग 2000 साल पहले, यूरेशिया के बड़े मैदानों में रहने वाले कबीलाई लोग इस क्षेत्र में आए। प्रारंभ में, एलेमाइट लोग यहां निवास करते थे, और धीरे-धीरे राजशाही की शुरुआत हुई। असीरियन साम्राज्य के बाद, मेडियन साम्राज्य का उदय हुआ। सायरस द ग्रेट ने मेडियन साम्राज्य को हराकर एकमेनड साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने ईरान का साम्राज्य पूर्वी यूरोप तक फैलाया।


सायरस का उदार शासन

सायरस को ग्रेट इसलिए कहा जाता है क्योंकि वह एक उदारवादी राजा थे। उनके शासन में क्षत्रप नियुक्त किए गए, जो जनता की भलाई के लिए कार्य करते थे। जब उन्होंने बेबीलोन को जीता, तो वहां के गुलाम यहूदियों को आजाद कर उन्हें जेरूसलम लौटने की अनुमति दी। यहूदियों के लिए, सायरस का सम्मान बहुत बड़ा है।


फारसी साम्राज्य का विस्तार

सायरस के बाद, डेरियस जर्क्स के शासन में फारसी साम्राज्य और भी विस्तारित हुआ। इस समय, फारस का साम्राज्य दुनिया की 44 प्रतिशत जनसंख्या पर शासन कर रहा था। 331 बीसी तक, एकमेनड साम्राज्य का राज रहा। इस दौरान, ग्रीस और मेसेडोनिया पर आक्रमण करने की गलती हुई, जिसके परिणामस्वरूप सिकंदर ने फारस पर आक्रमण किया।


सिकंदर का भारत में आगमन

सिकंदर ने फारस पर विजय प्राप्त करने के बाद भारत की ओर कदम बढ़ाया, लेकिन विश्व विजय का सपना लेकर उसे लौटना पड़ा। उसकी असमय मृत्यु के बाद, फारस पर सैल्युकेट वंश का शासन हुआ। इसके बाद पार्थियन वंश आया और लगभग 200 साल तक फारस सामंतों के कब्जे में रहा।


इस्लाम का आगमन और फारस का इतिहास

इस्लाम के आगमन के बाद, फारस पर अरबों का शासन रहा। 11वीं सदी में, सेलजुक वंश का राज हो गया, जिसे इस्लाम के गोल्डन पीरियड के रूप में जाना जाता है। इस दौरान, फारसी भाषा का पुनर्जागरण हुआ।