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ईरान का चौंकाने वाला दावा: अमेरिका में फिर से 9/11 जैसी घटना की योजना?

ईरान के पूर्व नेता के सलाहकार अली लारिजानी ने अमेरिका में 9/11 जैसी आतंकी घटना की योजना का दावा किया है। उन्होंने कहा कि इसका आरोप ईरान पर लगाया जा सकता है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जानें, लारिजानी ने क्या कहा और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का क्या असर हो सकता है।
 

ईरान का सनसनीखेज बयान


पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, ईरान ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अली लारिजानी ने कहा है कि अमेरिका में एक और 11 सितंबर जैसी आतंकी घटना को अंजाम दिया जा सकता है, और इसका आरोप ईरान पर लगाया जा सकता है।


तेहरान के बयान पर बहस

लारिजानी ने इस संभावित षड्यंत्र की कड़ी निंदा की और कहा कि ईरान किसी भी आतंकवादी गतिविधि का समर्थन नहीं करता। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कुछ लोगों का नेटवर्क अमेरिका में 9/11 जैसी घटना को अंजाम देने की योजना बना रहा है।


लारिजानी ने यह भी कहा कि ईरान का अमेरिकी जनता से कोई दुश्मनी नहीं है।


लारिजानी के आरोप और ट्रंप का संदर्भ


ईरान की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद तनावपूर्ण है। अमेरिका और इजरायल ईरान पर लगातार सैन्य दबाव बना रहे हैं, जबकि ईरान भी अपने विरोधियों पर हमले कर रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।


ट्रंप पर लारिजानी के आरोप

लारिजानी ने हाल के समय में अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप पर कई बार तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने ट्रंप का नाम जेफ्री एपस्टीन के साथ जोड़ते हुए आरोप लगाए हैं। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ईरान के नेता आम जनता के बीच रहते हैं, जबकि अमेरिका के कुछ नेता एपस्टीन जैसे विवादित व्यक्तियों से जुड़े रहे हैं।


जेफ्री एपस्टीन पर नाबालिगों के साथ यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उसकी मौत के बाद भी अमेरिकी एजेंसियों ने उससे जुड़े मामलों की जांच जारी रखी है।


डोनाल्ड ट्रंप का स्पष्टीकरण

हालांकि, ट्रंप ने कई बार कहा है कि उनका एपस्टीन से कोई खास संबंध नहीं था और वह कभी उसके निजी द्वीप पर नहीं गए। इसके बावजूद उनके विरोधी इस मुद्दे को उठाते रहते हैं। ईरान का यह नया दावा वैश्विक राजनीति और सुरक्षा से जुड़े सवालों को और जटिल बना रहा है।