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ईरान का शांति प्रस्ताव अमेरिका ने किया खारिज, ट्रंप ने दी चेतावनी

ईरान ने अमेरिका के सामने एक शांति प्रस्ताव रखा था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने की बात थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे खारिज कर दिया है। ट्रंप को ईरान की नीयत पर संदेह है और उन्होंने मिडटर्म चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अब अमेरिका को निर्णय लेना है। यह मामला बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच लटका हुआ है, जिससे भविष्य की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
 

ईरान का प्रस्ताव और अमेरिका की प्रतिक्रिया


नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में शांति की संभावनाओं को बढ़ाने वाला ईरान का एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंततः अस्वीकृत कर दिया गया है। ईरान ने अमेरिका के समक्ष एक 7-दिन का विशेष योजना प्रस्तुत की थी, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता को पुनः आरंभ करने का प्रस्ताव था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है, और अधिकारियों का कहना है कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।


यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया था। इसमें ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की पेशकश की थी, साथ ही दोनों देशों के बीच रुकी हुई परमाणु वार्ता को फिर से शुरू करने का भी सुझाव दिया था। इसके बदले में, ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं: पहली, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त किया जाए; दूसरी, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाए; और तीसरी, लेबनान को शामिल करते हुए एक व्यापक युद्धविराम लागू किया जाए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के अनुसार, अमेरिका इन कदमों को चार से पांच दिनों में पूरा कर सकता था, जिसके बाद छठे दिन होर्मुज खुलता और सातवें दिन वार्ता फिर से शुरू होती।


ट्रंप का निर्णय

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रंप को ईरान की नीयत पर भरोसा नहीं है, यही कारण है कि उन्होंने अपने करीबी सहयोगियों को सूचित किया है कि नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि हमला होता है, तो उसकी तीव्रता कितनी होगी।


रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप इस समय किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए पूरी तरह तैयार नहीं दिख रहे हैं। इसकी एक मुख्य वजह अमेरिका के पास मौजूद हथियारों का घटता भंडार है। अमेरिका इन हथियारों को भविष्य में किसी अन्य महत्वपूर्ण अवसर के लिए सुरक्षित रखना चाहता है, इसलिए वह जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठाने से बच रहा है।


ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने पहले ही स्पष्ट किया था कि अब निर्णय अमेरिका के हाथ में है। उनके अनुसार, ईरान किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी के आगे अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। इसके अलावा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रुख की सराहना की और बातचीत के माध्यम से मतभेदों को सुलझाने के लिए उनके समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।


वर्तमान में स्थिति यह है कि ईरान ने शांति का एक रास्ता प्रस्तुत किया था, लेकिन ट्रंप ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया है। ट्रंप को ईरान की नीयत पर संदेह है, और इसी बीच मिडटर्म चुनाव के बाद फिर से बमबारी की संभावना भी सामने आई है। यह मामला अभी बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच लटका हुआ है। आने वाले दिनों में ट्रंप का रुख क्या होगा, यह तय करेगा कि हालात किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।