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ईरान का सख्त संदेश: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के लिए नई चेतावनी

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज को रोककर अपने सख्त रुख का संकेत दिया है। यह घटना तब हुई जब पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की कहानी और ईरान के नए नियमों के बारे में। क्या यह क्षेत्र में तनाव को कम करेगा? पढ़ें पूरी जानकारी के लिए।
 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान का कड़ा रुख


मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पर ईरान का सख्त रुख एक बार फिर से देखने को मिला है। हाल ही में, कराची की ओर बढ़ रहे एक कंटेनर जहाज को इस मार्ग में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया गया। जानकारी के अनुसार, जहाज ने आवश्यक अनुमति नहीं ली थी, जिसके कारण उसे वापस लौटना पड़ा। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।


SELEN जहाज की यात्रा

रिपोर्टों के अनुसार, 'SELEN' नामक यह जहाज 23 मार्च की रात शारजाह एंकरेज से रवाना हुआ था और पाकिस्तान की दिशा में आगे बढ़ रहा था। AIS डेटा से पता चला कि जब यह होर्मुज के करीब पहुंचा, तो इसका मार्ग अचानक बदल गया और यह खाड़ी की ओर लौट गया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस कार्रवाई की पुष्टि की।


IRGC का स्पष्टीकरण

IRGC के वरिष्ठ अधिकारी रियर एडमिरल अलीरेजा तंगसीरी ने बताया कि जहाज अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन नहीं कर रहा था। उनके अनुसार, बिना पूर्व अनुमति के इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजरने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अब सभी जहाजों को ईरानी समुद्री प्राधिकरणों के साथ समन्वय करना अनिवार्य होगा, तभी उन्हें इस मार्ग से गुजरने की अनुमति मिलेगी।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश

'SELEN' एक छोटा फीडर कंटेनर जहाज है, जो सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे के तहत संचालित होता है और दुबई स्थित एक कंपनी द्वारा प्रबंधित किया जाता है। इस घटना में जहाज या उसके चालक दल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन इसे समुद्री व्यापार जगत के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।


इस बीच, पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच बातचीत की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रस्ताव को अपने सोशल मीडिया पर साझा किया, लेकिन वाशिंगटन की ओर से कोई औपचारिक सहमति नहीं मिली है।


वहीं, ईरान ने फिलहाल किसी भी वार्ता से इनकार किया है और संकेत दिए हैं कि वह अपने वर्तमान रुख पर कायम रहेगा। ऐसे में पाकिस्तान की पहल के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के आसार फिलहाल नहीं दिख रहे हैं।