ईरान की गोलीबारी से होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर गोलीबारी के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के कारण दो भारतीय जहाजों को लौटना पड़ा, जिनमें से एक में 20 लाख बैरल इराकी तेल था। ईरान ने फिर से सख्त पाबंदियों का ऐलान किया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
Apr 18, 2026, 20:10 IST
ईरान की कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव
ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक टैंकर पर गोलीबारी की, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। इस घटना के कारण दो भारतीय जहाजों को अपने मार्ग से लौटना पड़ा, जिनमें से एक बड़ा टैंकर था, जिसमें 20 लाख बैरल इराकी तेल भरा हुआ था। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब अमेरिका द्वारा नाकेबंदी की धमकी के बाद ईरान ने फिर से होर्मुज़ पर सख्त पाबंदियों का ऐलान किया। कल ईरान ने कहा था कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है, लेकिन आज उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने उनके बंदरगाहों और जहाजों पर नाकेबंदी कर रखी है। इसके बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो गन बोटें एक टैंकर के पास पहुंचीं और उन पर गोलियां चलाईं।
भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर ध्यान
सरकार ने बताया है कि डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग स्थिति पर नजर रख रहा है और जहाज के कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही अन्य भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस घटना के बाद भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया है।
ब्रिटिश मिलिट्री की रिपोर्ट
ब्रिटेन की मिलिट्री के यूके मेरिटाइन ट्रेड ऑपरेशन सेंटर ने पुष्टि की है कि जिस टैंकर पर गोलीबारी की गई, वह और उसका क्रू सुरक्षित हैं। हालांकि, उन्होंने जहाज का नाम या उसकी गंतव्य स्थान का खुलासा नहीं किया। टैंकर ट्रैकर्स नामक एक वेबसाइट ने बताया कि दो भारतीय जहाज होर्मुज़ की खाड़ी से गुजरने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन गोलीबारी की खबर सुनते ही उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया।
तेल की आपूर्ति पर संभावित प्रभाव
इनमें से एक जहाज भारतीय झंडे वाला बड़ा टैंकर था, जिसमें 20 लाख बैरल इराकी तेल भरा हुआ था। यह तेल इराक से खरीदा गया था और किसी अन्य देश को भेजा जाना था, लेकिन अब यह जहाज वापस लौट गया है। खाड़ी में तनाव फिर से बढ़ गया है, और ईरान ने स्पष्ट किया है कि बिना उसकी अनुमति के कोई भी जहाज होर्मुज़ से नहीं गुजर सकता। अमेरिका की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। 22 अप्रैल को दो हफ्ते का युद्ध विराम समाप्त होने वाला है, और यदि इस तारीख तक अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हुआ, तो होर्मुज़ का यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आएगी और ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है।