ईरान की मिसाइल तकनीक: अमेरिका के लिए बढ़ती चुनौतियाँ
ईरान की सटीक मिसाइल हमले
मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जैसे कि जॉर्डन, कुवैत और बहरीन, पर हाल के दिनों में ईरान द्वारा किए गए हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। ईरान ने अमेरिकी केंद्रों को निशाना बनाकर व्यापक तबाही मचाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि ईरान की सटीकता का रहस्य क्या है। चाहे वह बैलेस्टिक मिसाइलें हों या ड्रोन, ईरान के हमले अमेरिकी ठिकानों पर प्रभावी साबित हो रहे हैं। अमेरिका ने भी स्वीकार किया है कि उसके सैनिकों को नुकसान हुआ है, भले ही आंकड़े छिपाए गए हों। ईरान ने अपने मीडिया के माध्यम से कई बार अमेरिकी ठिकानों की तस्वीरें साझा की हैं, जो अमेरिका के लिए एक सीधा चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलजनाह ने ईरान को इस दिशा में मार्गदर्शन किया है, जबकि शाहिद हदीद ड्रोन और हज कासिम तथा खैबर शिकन मिसाइलों ने अमेरिकी ठिकानों को नष्ट किया।
ईरान की मिसाइल तकनीक का प्रभाव
ईरान ने अपने हमलों में ऐसी मिसाइल तकनीक का उपयोग किया है जिसने भारी नुकसान पहुँचाया है। इस कारण अमेरिका और इसराइल को अपनी अगली रणनीति पर विचार करना पड़ रहा है। जुलजनाह, जो ईरान का सेटेलाइट लांचर है, ने इसराइल में लक्ष्यों की सटीक जानकारी प्रदान की है। जुलजनाह का नाम उस अरबी घोड़े के नाम पर रखा गया है जो हुसैन इबने अली का था।
ईरान की तैयारी और मिसाइलों की विशेषताएँ
ईरान ने खैबर शिकन और हज कासिम मिसाइलों के माध्यम से हमले तेज कर दिए हैं। हज कासिम मिसाइल, जो 2020 में पहली बार देखी गई थी, 1400 किमी की रेंज और 120,000 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुँच सकती है। यह मिसाइल 500 किलोग्राम के वॉरहेड के साथ हमला कर सकती है और इसका नाम कासिम सुलेमानी के नाम पर रखा गया है। ईरान की तैयारियाँ अमेरिका और इसराइल के साथ संभावित संघर्ष के लिए मजबूत मानी जा रही हैं।
ईरान की नई मिसाइलें
ईरान ने इमाद मिसाइल का भी प्रदर्शन किया है, जो अपनी पैतरेबाजी के लिए जानी जाती है। इसकी रेंज 1700 किमी है और इसका वॉरहेड 750 किलो का है। इसके अलावा, सिज्जील मिसाइल के चर्चे भी हो रहे हैं, जिसका नाम कुरान की सूर अलफील से लिया गया है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि जब अमेरिका और इसराइल ईरान को खत्म करने की योजना बना रहे थे, तब ईरान की बैलेस्टिक मिसाइलें जॉर्डन में गरज रही थीं।