ईरान की मोजेक डिफेंस: क्या यह रणनीति युद्ध का समीकरण बदल सकती है?
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसमें लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है। पहले ऐसा माना जा रहा था कि ईरान जल्दी ही झुक जाएगा, जैसा कि इराक युद्ध के दौरान हुआ था। लेकिन इस बार स्थिति भिन्न है। हमलों के कई दिनों बाद भी ईरान ने मजबूती से खड़ा रहकर जवाब दिया है।
क्या ईरान की मजबूती के पीछे कोई योजना है?
ईरान की इस मजबूती के पीछे एक विशेष सैन्य रणनीति है, जिसे मोजेक डिफेंस कहा जाता है। यह योजना अचानक नहीं बनी, बल्कि इसे कई सालों पहले तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि युद्ध के समय देश तुरंत न गिरे और सेना बिना आदेश के भी लड़ सके। यही कारण है कि हमले के बावजूद ईरान का सिस्टम नहीं टूटा।
मोजेक डिफेंस की रचना
इस रणनीति के पीछे ईरान के सैन्य नेता मोहम्मद अली जाफरी का दिमाग है, जो ईरान की शक्तिशाली फोर्स आईआरजीसी के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। जाफरी ने पहले ही इस खतरे को पहचान लिया था कि भविष्य में ईरान को भी इराक जैसा हमला झेलना पड़ सकता है। इसी सोच ने उन्हें नई सैन्य योजना बनाने के लिए प्रेरित किया।
इराक युद्ध से मिली सीख
2003 का इराक युद्ध जाफरी के लिए एक महत्वपूर्ण सबक था। अमेरिका ने सद्दाम हुसैन की सेना को जल्दी हरा दिया था, जिसका मुख्य कारण केंद्रीकृत कमान का खत्म होना था। जाफरी ने तय किया कि ईरान में ऐसा नहीं होगा। अगर शीर्ष नेता भी मारे जाएं, तो भी सेना को लड़ना चाहिए। यही सोच मोजेक रणनीति की नींव बनी।
ईरान की सेना में बदलाव
जाफरी ने सेना को छोटे स्वतंत्र ढांचों में विभाजित करना शुरू किया। देशभर में विभिन्न कमांड स्थापित की गईं, कुल मिलाकर इकतीस क्षेत्रीय कमांड बनाई गईं। हर कमांड के पास अपने सैनिक और संसाधन हैं, जिससे उन्हें हर बार ऊपर से आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ता।
मोहम्मद अली जाफरी का परिचय
मोहम्मद अली जाफरी का सैन्य करियर बहुत महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने आईआरजीसी में इंटेलिजेंस यूनिट से शुरुआत की और ईरान-इराक युद्ध में भी भाग लिया। धीरे-धीरे वे सेना में ऊंचे पदों तक पहुंचे और 1990 के दशक में ग्राउंड फोर्स की जिम्मेदारी संभाली।
क्या मोजेक डिफेंस युद्ध का समीकरण बदल सकती है?
आज मोजेक डिफेंस की चर्चा विश्वभर में हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध की सोच को बदल सकती है। अब सेना केवल एक कमान पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि छोटी स्वतंत्र इकाइयां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ईरान का मौजूदा युद्ध इसका एक उदाहरण है, जहां हमलों के बावजूद सिस्टम काम कर रहा है।