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ईरान की मोजेक डॉक्ट्रिन: अमेरिका के खिलाफ नई रणनीति

ईरान की मोजेक डॉक्ट्रिन ने देश को विभिन्न हिस्सों में विभाजित कर दिया है, जिससे अमेरिका की सैन्य रणनीतियों का सामना करना आसान हो गया है। इस लेख में जानें कि कैसे ईरान ने पिछले 30 वर्षों में अपनी रक्षा रणनीतियों को विकसित किया है और कैसे यह अमेरिका के खिलाफ एक नई चुनौती पेश कर रहा है। क्या मोजतबा खामनेई जीवित हैं? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर।
 

ईरान पर अमेरिका और इजराइल का हमला

28 फरवरी 2026 को, इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया। इस हमले के बाद उम्मीद थी कि 24 से 72 घंटों के भीतर स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी और ईरान का शासन समाप्त हो जाएगा। अब्बास अरागची ने एक सैन्य अधिकारी, मोहम्मद अली जाफरी का जिक्र किया, जो ईरान की आईआरजीसी का एक सदस्य है। वह घटनाओं का अध्ययन कर रहा है और ईरान के चारों ओर हुए संघर्षों से सीख ले रहा है। जब बमबारी हुई, तो उन्हें पता चला कि सुप्रीम लीडर और उनके कई शीर्ष सहयोगी मारे गए हैं।


खामनेई के बाद का संकट

अयातुल्ला खामनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। हालांकि, उनके जीवित होने के बारे में कोई ठोस सबूत नहीं है। मोजतबा की कोई सार्वजनिक उपस्थिति नहीं हुई है, जिससे अटकलें बढ़ गई हैं कि वह गंभीर रूप से घायल हैं या संभवतः मर चुके हैं। ईरान ने पिछले 30 वर्षों में ऐसी परिस्थितियों के लिए तैयारी की है।


मोजेक डॉक्ट्रिन की परिभाषा

मोजेक डॉक्ट्रिन ने ईरान को विभिन्न हिस्सों में विभाजित किया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इसे 25 से 31 भागों में बांटा गया है। यह महत्वपूर्ण नहीं है कि कितने भाग हैं, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक भाग स्वतंत्र है। इससे अमेरिका को ईरान की गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।


मोजेक डॉक्ट्रिन का कार्यप्रणाली

उत्तर और पश्चिमी ईरान में अलग-अलग गतिविधियाँ चल रही हैं, और प्रत्येक क्षेत्र के पास अपनी खुद की सैन्य क्षमताएँ हैं। मोजेक डॉक्ट्रिन का उद्देश्य ईरान को हारने से बचाना है, भले ही वह जीत न सके। यदि अमेरिका को जीत भी मिलती है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


समय का महत्व

मोजेक डिफेंस में समय एक महत्वपूर्ण कारक है। इसमें लड़ाई को लंबा खींचना एक रणनीति बन जाती है। उदाहरण के लिए, ड्रोन बनाना सस्ता होता है, लेकिन उन्हें रोकने के लिए महंगे मिसाइल सिस्टम की आवश्यकता होती है। इससे मजबूत देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।