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ईरान के खर्ग द्वीप पर हमले: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

ईरान के खर्ग द्वीप पर हालिया हमलों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। ट्रंप द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद, ईरान ने कड़ी चेतावनी जारी की है। जानें इस स्थिति का क्या प्रभाव हो सकता है और खर्ग द्वीप की रणनीतिक महत्वता के बारे में।
 

खर्ग द्वीप पर हमलों की स्थिति


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले ही खर्ग द्वीप पर हमले किए गए हैं। इस घटना ने क्षेत्र में तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।


हमलों की जानकारी

ईरान के अर्ध-सरकारी समाचार पत्र मेहर न्यूज ने मंगलवार को बताया कि खर्ग द्वीप पर कई हमले हुए हैं। यह द्वीप ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है, जो देश के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत संभालता है। यहां लगभग 30 मिलियन बैरल तेल भंडारण की क्षमता है।


ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इन हमलों के बाद कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अब संयम का समय समाप्त हो चुका है। आईआरजीसी ने यह भी चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरानी संपत्तियों पर हमले जारी रखते हैं, तो मध्य पूर्व में तेल और गैस की आपूर्ति कई वर्षों तक प्रभावित हो सकती है।


ट्रंप का अल्टीमेटम

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए खोलने का अल्टीमेटम दिया है, जिसकी समय सीमा मंगलवार रात 8 बजे (वाशिंगटन समय) तक है। यदि ईरान इस आदेश का पालन नहीं करता है, तो अमेरिका ने बड़े पैमाने पर हमले की धमकी दी है।


यह हमला ईरान द्वारा अमेरिका की एक और युद्धविराम योजना को अस्वीकार करने के एक दिन बाद हुआ है। युद्ध अब छठे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। ट्रंप ने पहले भी खर्ग द्वीप पर हमले की चेतावनी दी थी और कहा था कि वे द्वीप पर कब्जा करने पर भी विचार कर रहे हैं।


खर्ग द्वीप का महत्व

खर्ग द्वीप ईरान के तट से लगभग 16 मील की दूरी पर स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य से लगभग 300 मील उत्तर-पश्चिम में है। इसकी एकांत स्थिति और मजबूत सुरक्षा के कारण इसे अक्सर 'निषिद्ध द्वीप' कहा जाता है।


पिछले महीने अमेरिका ने यहां सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसमें नौसैनिक खदान भंडारण और मिसाइल बंकर नष्ट कर दिए गए थे। हालांकि, तेल संबंधी बुनियादी ढांचा उस समय ज्यादातर सुरक्षित रहा था। आईआरजीसी ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरानी संपत्तियों को निशाना बनाया गया, तो क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी ऊर्जा सुविधाओं को 'राख में बदल' दिया जाएगा।