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ईरान के खारग द्वीप पर हमले: अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव का अस्वीकार

ईरान के खारग द्वीप पर हाल ही में हुए हमलों ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है, खासकर जब अमेरिका ने एक युद्धविराम प्रस्ताव पेश किया था जिसे ईरान ने अस्वीकार कर दिया। खारग द्वीप, जो ईरान के कच्चे तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है, की स्थिति और महत्व को समझना आवश्यक है। इस द्वीप की लोडिंग क्षमता और ईरान की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव के बारे में जानें।
 

ईरान के खारग द्वीप पर हमलों की रिपोर्ट

एक महीने से चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका द्वारा पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद, ईरान के खारग द्वीप पर कई हमले हुए हैं। यह जानकारी ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ने मंगलवार को दी। खारग द्वीप, जो ईरान का प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है, मुख्य भूमि से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और यह विश्व में तेल शिपमेंट का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 13 मार्च को कहा था कि उनकी सेना ने खारग द्वीप पर सभी सैन्य ठिकानों को "पूर्ण रूप से नष्ट" कर दिया है। उन्होंने इसे मध्य पूर्व के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक बताया।


खारग द्वीप का महत्व

खारग द्वीप, जो ईरान के तट से केवल 25 किलोमीटर दूर है, फारस की खाड़ी में स्थित एक महत्वपूर्ण स्थान है। यह 20 स्क्वायर किलोमीटर का कोरल द्वीप है और इसे ईरान की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार माना जाता है। यहाँ से ईरान का अधिकांश कच्चा तेल लोड होता है, जो वैश्विक बाजार में भेजा जाता है। ईरान के बजट का लगभग 40% इसी द्वीप से आता है, जिससे देश की सेना की सैलरी और सरकारी खजाना भी प्रभावित होता है।


खारग द्वीप की लोडिंग क्षमता

खारग द्वीप की लोडिंग क्षमता लगभग 70 लाख बैरल प्रति दिन है, और यह ईरान के कच्चे तेल के निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने से पहले इसी द्वीप से होकर गुजरता है। इस द्वीप का महत्व ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए इसे एक संवेदनशील स्थिति में डालता है, खासकर जब अमेरिका और इज़राइल ईरान को कमजोर करने के उपाय तलाश रहे हैं।