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ईरान के ड्रोन युद्ध में नई रणनीतियाँ और भारत की तैयारी

ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे युद्ध में कम लागत वाले ड्रोन का उपयोग कर महत्वपूर्ण लाभ हासिल किया है। शाहेद-136 ड्रोन की प्रेरणा से भारत भी अपनी स्वदेशी ड्रोन क्षमताओं को बढ़ा रहा है। इस लेख में, हम ईरान के ड्रोन, उनके प्रभाव, और भारत के स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे ये ड्रोन युद्ध के समीकरण को बदल रहे हैं और भारत की तैयारी क्या है।
 

ईरान के ड्रोन और उनकी प्रभावशीलता

ईरान ने अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे संघर्ष में कम लागत वाले ड्रोन का उपयोग कर महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त किया है। शाहेद-136 ड्रोन के आधार पर विकसित स्वदेशी ड्रोन की लागत 20,000 से 50,000 डॉलर के बीच है। अमेरिका का LUCAS ड्रोन भी इसी डिज़ाइन पर आधारित है। भारत भी अपनी लंबी दूरी के मारक ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा है। ईरान के ड्रोन ने रूस-यूक्रेन युद्ध में अपनी प्रभावशीलता साबित की, जिससे कीव को उन्हें रोकने के लिए भारी खर्च करना पड़ा। ईरान की ड्रोन और मिसाइल क्षमताएँ बिना प्रभावी वायुसेना के भी उसे दुश्मनों के अंदर तक मार करने में सक्षम बनाती हैं।


कम लागत वाले ड्रोन का आर्थिक प्रभाव

कम लागत वाले ड्रोन दुश्मनों को आर्थिक और भौतिक रूप से कमजोर करने में सहायक होते हैं। उदाहरण के लिए, शाहेद-136 ड्रोन की लागत 20,000 से 50,000 डॉलर है, जबकि अमेरिका और इज़राइल इन्हें रोकने के लिए लाखों डॉलर खर्च कर रहे हैं। प्रत्येक पैट्रियट मिसाइल की कीमत 40 लाख डॉलर है। भारत के पास पहले से ही कई स्वदेशी ड्रोन हैं, जो विभिन्न परिचालन कार्यों में उपयोग किए जा रहे हैं।


भारत के स्वदेशी ड्रोन प्रोजेक्ट

भारत में कई स्वदेशी हमलावर ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं, जैसे नागास्त्र-1, जिसे 2024 से शामिल किया जाएगा। ये ड्रोन सटीक हमलों के लिए सक्षम हैं। अल्फा डिजाइन द्वारा विकसित स्काईस्ट्राइकर ड्रोन ने जम्मू और कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी क्षमताएँ प्रदर्शित की हैं। प्रोजेक्ट केएएल, जो अभी प्रारंभिक चरण में है, 1,000 किमी तक की मारक क्षमता के साथ गहरे क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले स्ट्राइक ड्रोन के रूप में डिज़ाइन किया गया है।


ऑपरेशन सिदूर में ड्रोन का उपयोग

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर उपयोग किया। इस ऑपरेशन में, भारत ने पहले दिन ही कई आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। ड्रोन का उपयोग पाकिस्तानी सेना के खिलाफ भी किया गया, जिससे दुश्मन के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ।