ईरान के परमाणु भंडार की सुरक्षा में बढ़ोतरी: क्या समझौता संभव है?
संभावित समझौते की उम्मीदें बढ़ी
नई दिल्ली: वॉशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चल रही वार्ताएँ एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गई हैं, जिससे संभावित समझौते की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बीच, खबरें आई हैं कि ईरान ने अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार की सुरक्षा को और मजबूत किया है, जिससे इस सामग्री तक पहुँच और उसे निकालना कठिन हो सकता है।
सुरक्षा उपायों में वृद्धि
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के हफ्तों में ईरान ने उन भूमिगत सुरंगों और रास्तों को बंद या क्षतिग्रस्त कर दिया है, जो उसके संवर्धित यूरेनियम भंडार तक पहुँचने के प्रमुख मार्ग माने जाते थे। इसके अलावा, कुछ प्रवेश बिंदुओं के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए गए हैं। इन कदमों का उद्देश्य संवेदनशील परमाणु सामग्री को संभावित सैन्य कार्रवाई या जब्ती से सुरक्षित रखना है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लगभग आधा टन उच्च संवर्धित यूरेनियम अब ऐसी जगहों पर रखा गया है, जहाँ पहुँच पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक बड़ा हिस्सा मध्य ईरान के इस्फहान स्थित परमाणु परिसर के भूमिगत क्षेत्रों में हो सकता है, जबकि कुछ मात्रा अन्य स्थानों पर भी संग्रहीत है।
अमेरिका का रुख
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया था कि यदि आवश्यक हुआ, तो अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेने पर विचार कर सकता है। माना जा रहा है कि इसी बयान के बाद तेहरान ने अपने परमाणु भंडार की सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया।
समझौते की संभावनाएँ
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते में यह अपेक्षा की जा रही है कि ईरान अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को या तो नष्ट करेगा या फिर उसे देश से बाहर भेजेगा। अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी संकेत दिया है कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब पहुँच चुके हैं और इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
विशेषज्ञों की राय
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समझौता हो भी जाता है, तब भी यूरेनियम को सुरक्षित रूप से निकालना और उसके पूर्ण हस्तांतरण की पुष्टि करना आसान नहीं होगा। पूर्व परमाणु सुरक्षा अधिकारी स्कॉट रोकर के अनुसार, यदि भंडार तक पहुँच सीमित हो गई है, तो उसकी निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया जटिल बन सकती है। इससे भविष्य में किसी भी परमाणु समझौते के पालन की जांच करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का बयान
इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का मसौदा लगभग तैयार है और अगले 24 घंटों में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल सकती है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं।