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ईरान के पूर्व लीडर खामेनेई की अंतिम विदाई: कुरान की आयतों के माध्यम से कूटनीतिक संदेश

तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई में 30 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर पढ़ी गई कुरान की आयतों ने न केवल धार्मिक महत्व रखा, बल्कि विभिन्न देशों के लिए कूटनीतिक संदेश भी दिया। सऊदी अरब के लिए 'बद्र की जंग' की याद दिलाई गई, जबकि भारत, रूस और चीन के लिए नरम लहजे में संदेश दिए गए। जानें इस महत्वपूर्ण घटना के पीछे की कूटनीतिक रणनीतियों के बारे में।
 

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर को विदाई


नई दिल्ली: 4 जुलाई 2026 को तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई दी गई। इस अवसर पर 30 से अधिक देशों और गैर-राज्य संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान पढ़ी गई कुरान की आयतों ने विशेष चर्चा का विषय बना लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि हर देश के लिए एक विशेष आयत का चयन कर ईरान ने एक संतुलित कूटनीतिक संदेश देने का प्रयास किया।


सऊदी अरब के लिए विशेष संदर्भ

सऊदी अरब को 'बद्र की जंग' की याद


जब सऊदी अरब का प्रतिनिधिमंडल ताबूत के पास पहुंचा, तब सूरह अल इमरान की आयत 3:13 पढ़ी गई। यह आयत 'बद्र की जंग' से संबंधित है, जो 624 ईस्वी में सऊदी की धरती पर लड़ी गई थी। इस घटना में एक छोटी मुस्लिम सेना ने बड़ी दुश्मन सेना को हराया था। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक शाहीन मोदारेस ने इसे 'आयतों के माध्यम से शीत युद्ध कालीन क्रेमलिनोलॉजी' के रूप में वर्णित किया।


मिडिल ईस्ट आई के अनुसार, इस संदर्भ में दो अर्थ निकाले जा सकते हैं। एक तो साझा इस्लामिक इतिहास की याद दिलाना और दूसरा रियाद के लिए एक तीखा संकेत। ईरान ने खुद को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ एक मजबूत ताकत के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि सऊदी अरब को वॉशिंगटन के साथ खड़े होने की याद दिलाई गई।


ईरान के सहयोगियों को प्रोत्साहन

'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' को मिला हौसला


ईरान के सहयोगी गुटों के लिए शहादत और विजय की आयतें पढ़ी गईं। हमास के प्रतिनिधियों के लिए वह आयत पढ़ी गई जिसमें अल्लाह से किए गए वादों का उल्लेख है।


हिज्बुल्लाह के लिए कहा गया कि अल्लाह पर भरोसा रखने वाले कमजोर न हों और शोक न मनाएं, क्योंकि अंततः जीत उन्हीं की होगी। यमन के हुथियों को दृढ़ता और साहस वाली आयतें सुनाई गईं, जिससे तेहरान ने अपने सहयोगियों को यह विश्वास दिलाया कि वह उनके साथ खड़ा है।


भारत, रूस और चीन के लिए नरम संदेश

भारत, रूस, चीन के लिए नरम लहजा


रूस, चीन और भारत जैसे मित्र देशों के लिए युद्ध की नहीं, बल्कि सांत्वना और धार्मिकता की आयतें चुनी गईं। चीन के लिए कहा गया कि जीत केवल अल्लाह से मिलती है। वहीं रूस के लिए कहा गया कि अंततः फैसला नेक लोगों के पक्ष में होता है। भारत के लिए 'कमजोर न पड़ें और शोक न मनाएं' वाले हिस्से का छोटा और सौम्य अंश पढ़ा गया।


जनाजे के बाद ईरान ने भारत का आभार व्यक्त किया, यह कहते हुए कि भारत की उपस्थिति दोनों देशों के स्थायी संबंधों का 'अनमोल सबूत' है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान ने अपने 'प्रतिरोध के अक्ष' से दोस्तों को अलग रखा।


कूटनीतिक संदेश का महत्व

सहयोगियों की तारीफ की, लेकिन वैचारिक लड़ाई से दूर रखा


ईरान ने अपने सहयोगियों की सराहना की, लेकिन उन्हें अपनी वैचारिक लड़ाई में नहीं खींचा। शाहीन मोदारेस ने लिखा, "हर प्रतिनिधिमंडल को एक आयत मिली। सऊदी को डांटा गया, तुर्किये को शर्मिंदा किया गया, प्रॉक्सी को सांत्वना दी गई। कल ताबूत आयतों में बोल रहा था।" यह पहली बार नहीं है, अप्रैल में भी ईरान ने अमेरिकी धमकियों का जवाब कुरान की आयतों से दिया था।