×

ईरान के मसूद पेजिश्कियान: ब्रिक्स समिट में नई कूटनीति का प्रतीक

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान की ब्रिक्स समिट में भागीदारी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। उनकी कहानी एक हार्ट सर्जन से लेकर ईरान की राजनीति के विश्वसनीय चेहरे तक की है। इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे पेजिश्कियान ने ईरान की नई कूटनीति को आकार दिया है और उनकी उपस्थिति का भारत और ईरान के रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। क्या यह समिट दोनों देशों के बीच नए संवाद का द्वार खोलेगी? जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

ईरान की नई राजनीतिक पहचान

इजराइल के हमलों, अमेरिका के दबाव, आर्थिक संकट और पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात के बीच, ईरान का एक प्रमुख चेहरा मसूद पेजिश्कियान उभरकर सामने आया है। सवाल यह है कि सुप्रीम लीडर अली खामनेई ने उन पर इतना भरोसा क्यों किया? अब जब वह ब्रिक्स समिट में भाग लेने के लिए दिल्ली आ रहे हैं, तो क्या यह भारत और ईरान के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है? मसूद पेजिश्कियान केवल ईरान के राष्ट्रपति नहीं हैं, बल्कि ऐसे नेता हैं जिन पर ईरान की सत्ता के कठिन समय में सबसे अधिक भरोसा किया गया। दिलचस्प बात यह है कि वह कोई कट्टर मौलवी या सेना के जनरल नहीं, बल्कि एक हार्ट सर्जन हैं। दिल के ऑपरेशन करने वाले इस डॉक्टर ने आज ईरान की राजनीति में एक विश्वसनीय चेहरा बना लिया है। यही कारण है कि जब ईरान पर बाहरी दबाव बढ़ा, तो खामनेई ने उन्हें सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना।


ब्रिक्स समिट में भागीदारी

अब मसूद पेजिश्कियान दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स समिट में शामिल होने जा रहे हैं। इससे पहले, वह एसइओ समिट में भी विश्व के प्रमुख नेताओं के साथ नजर आए थे। यह केवल एक विदेश यात्रा नहीं, बल्कि ईरान की नई कूटनीति का संकेत माना जा रहा है। मसूद पेजिश्कियान की कहानी अस्पताल से शुरू होती है। उनका जन्म 1954 में ईरान के महाबाद शहर में हुआ। उनके पिता अजर बैजानी और मां खुर्द समुदाय से हैं, जिससे उन्हें ईरान के दो प्रमुख समुदायों का अनुभव मिला। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई की और हार्ट सर्जन बने। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने घायल सैनिकों का इलाज किया, जिससे उन्हें आम लोगों के बीच एक संवेदनशील नेता के रूप में पहचान मिली। बाद में, वह स्वास्थ्य मंत्री बने और कई बार सांसद चुने गए। उनका राजनीतिक सफर धीरे-धीरे बना, अचानक नहीं।


चुनाव और सुधारवादी दृष्टिकोण

2024 में राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना के बाद हुए चुनाव में, मसूद पेजिश्कियान ने खुद को एक सुधारवादी नेता के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ईरान को दुनिया से संवाद करना चाहिए, अर्थव्यवस्था में सुधार लाना चाहिए और लोगों की जिंदगी को आसान बनाना चाहिए।


वैश्विक मुद्दों पर ध्यान

दुनिया की नजर इस बात पर है कि चीन, रूस, ईरान और भारत जैसे विभिन्न हितों वाले देश एक साझा एजेंडा कैसे बना पाते हैं। पश्चिम एशिया का युद्ध, रूस-यूक्रेन संघर्ष और वैश्विक भुगतान प्रणाली जैसे मुद्दे एजेंडे में रहेंगे। क्या ब्रिक्स देशों के बीच एक ऐसा प्लेटफार्म बनेगा जो भुगतान को बेहतर तरीके से संचालित कर सके? मसूद पेजिश्कियान की उपस्थिति ईरान का संदेश है कि वह वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। उनकी सबसे बड़ी चुनौती ईरान की अर्थव्यवस्था है, जो वर्षों से लगे प्रतिबंधों के कारण संकट में है। उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद आर्थिक सुधार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और विदेशी निवेश बढ़ाने की बात की है।


भारत-ईरान संबंधों का भविष्य

मसूद पेजिश्कियान रूस और चीन जैसे साझेदारों के साथ-साथ भारत और अन्य वैश्विक दक्षिण देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर भारत और ईरान के बीच चाबहार ऊर्जा और व्यापार पर नई बातचीत होती है, तो इसका प्रभाव दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया की राजनीति पर पड़ सकता है। ब्रिक्स समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मसूद पेजिश्कियान की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि यह दो देशों के बीच बातचीत होगी जो विभिन्न वैश्विक गुटों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।