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ईरान के राष्ट्रपति का न्यूयॉर्क दौरा: संयुक्त राष्ट्र महासभा में महत्वपूर्ण भाषण

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने पहुंचे हैं। उनका यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान के बाद हो रहा है। पेजेशकियन अपने भाषण में ईरान का पक्ष प्रस्तुत करेंगे, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। इस दौरान ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की मुलाकात ने भी ध्यान आकर्षित किया है। जानें इस महत्वपूर्ण दौरे के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

ईरान के राष्ट्रपति का न्यूयॉर्क आगमन

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। वह वैश्विक नेताओं के समक्ष अपना भाषण प्रस्तुत करेंगे। इस समय ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष पर पूरी दुनिया की नजरें हैं, और यह मुद्दा इस महत्वपूर्ण बैठक का केंद्र बन गया है।


डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद की यात्रा

पेजेशकियन का यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान के एक दिन बाद हुआ है। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा था कि अमेरिका मध्यावधि चुनावों के बाद तेहरान के साथ समझौता कर सकता है, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह से "तबाह" कर देगा।


ईरान का पक्ष प्रस्तुत करेंगे पेजेशकियन

अपने भाषण में, पेजेशकियन ईरान के दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेंगे। न्यूयॉर्क के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने कहा, "ईरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखेगा और देश का संदेश दुनिया तक पहुंचाने के लिए इस अवसर का पूरा लाभ उठाएगा।"


कूटनीतिक बातचीत का दौर

पेजेशकियन के दौरे के दौरान, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ भी तेज हो गई हैं। अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बताया कि मध्यस्थों के माध्यम से दोनों देशों की टीमों के बीच लंबी बातचीत हुई है, जिसने दौरे के माहौल को और भी गर्म कर दिया है।


ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात

इस बीच, ट्रंप ने अपने भाषण में कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ उनकी मुलाकात ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर ध्यान आकर्षित किया। जेलेंस्की ने रूस के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की मांग की और ट्रंप से अपील की कि वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी आगामी बैठक में इस मुद्दे को उठाएं, ताकि चीन के माध्यम से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव डाला जा सके।