×

ईरान के राष्ट्रपति का पाकिस्तान दौरा: अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच महत्वपूर्ण कदम

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान ने पाकिस्तान का दौरा किया है, जो अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम है। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समझौते को राजनीतिक लाभ में बदलना है। ईरान की सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस डील से उनकी प्रॉक्सी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जानिए इस दौरे के पीछे की रणनीति और ईरान की आंतरिक स्थिति के बारे में।
 

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का महत्व

स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता चल रही है, जबकि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान पाकिस्तान पहुंच चुके हैं। उनका यह दौरा एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए है। स्विट्जरलैंड में एक सप्ताह का रोडमैप तैयार किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस पर कितना कार्य होगा, यह दोनों देशों की जिम्मेदारियों पर निर्भर करेगा। ईरान के राष्ट्रपति ने 40 दिनों की संघर्ष और लगभग तीन महीने के तनाव के बाद पाकिस्तान को अपने पहले दौरे के लिए चुना। इससे पहले, ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ओमान से सीधे इस्लामाबाद पहुंचे, जहां उनका स्वागत पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय में किया गया। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनकी अगवानी की। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ने इस स्वागत का वीडियो जारी किया है। इसके बाद, ईरानी राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेजिश्कियान भी पाकिस्तान पहुंचे, जहां पाकिस्तान एयरफोर्स ने उनका स्वागत किया।


पाकिस्तान की भूमिका और ईरान-अमेरिका डील

पाकिस्तान ने ईरान-अमेरिका डील के गारंटर के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। पाकिस्तान और कतर ने यह घोषणा की है कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौते की दिशा में 60 दिनों का रोडमैप तैयार किया गया है। इस संदर्भ में, ईरान के सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान का कार्यकाल एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक निर्णय है। उनकी सरकार ने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मुस्तबा खामने को भरोसा दिलाया है कि अमेरिका के साथ डील की गई है, लेकिन अमेरिका और इसराइल की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। ईरान में इस समझौते को लेकर मतभेद भी हैं, और एक बड़ा तबका यह मानता है कि अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना गलत है। इसलिए पेजिश्कियान का इस्लामाबाद जाना इस बात का संकेत है कि उन्हें इस नाजुक समझौते को राजनीतिक लाभ में बदलना है।


ईरान की आंतरिक स्थिति और भविष्य की चुनौतियाँ

ईरान की सरकार और नेताओं ने आश्वासन दिया है कि इस डील से ईरान की प्रॉक्सी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ईरानी रेजिस्टेंस की सुरक्षा सरकार द्वारा की जाएगी। इस बीच, ईरान ने होर्मस के जलडमरूमध्य पर झुकने के संकेत भी दिए हैं। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान मिलकर होर्मस स्टेट को खोलने पर काम कर सकते हैं। स्विट्जरलैंड से लौटते समय उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि होर्मस स्टेट कभी भी युद्ध की पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से पालन करेगा। हालांकि, ईरान का थोड़ा सा भी झुकाव वहां के जनमानस और आईआरजीसी को नाराज कर सकता है, यही कारण है कि राष्ट्रपति पेजिश्कियान पाकिस्तान पहुंचे हैं।