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ईरान के रासायनिक और जैविक हथियारों की बढ़ती चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में युद्ध का सबसे गंभीर चरण अभी आना बाकी है, जिसमें रासायनिक और जैविक हथियारों का विकास चिंता का विषय है। अमेरिका ने ईरान की हकीमान शार्ग रिसर्च कंपनी पर प्रतिबंध लगाया है, जबकि ईरान पर रासायनिक हथियार सम्मेलन का उल्लंघन करने के आरोप हैं। इस लेख में ईरान के हथियार कार्यक्रमों, उनके विकास और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
 

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में युद्ध का सबसे गंभीर चरण अभी आना बाकी है। तेल स्थलों पर हमले, होर्मुज की खाड़ी का बंद होना, डेटा केंद्रों का नष्ट होना और नागरिक क्षेत्रों में मिसाइलों की बौछार से और अधिक नुकसान हो सकता है। अमेरिका को संदेह है कि ईरान दशकों से रासायनिक और जैविक हथियारों का विकास कर रहा है। गंभीर स्थिति में, तेहरान या उसके प्रॉक्सी इन हथियारों का उपयोग कर सकते हैं, जिससे वैश्विक तबाही और युद्ध को लंबा खींचा जा सके।


अमेरिका द्वारा प्रतिबंध

12 जुलाई 2024 को अमेरिका ने ईरान की हकीमान शार्ग रिसर्च कंपनी पर प्रतिबंध लगाया, जिसका आरोप था कि वह रासायनिक हथियार कार्यक्रम के तहत दवा-आधारित एजेंटों के विकास में संलग्न है। अमेरिका ने यह भी कहा कि ईरान ने रासायनिक हथियार सम्मेलन (सीडब्ल्यूसी) का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह बैन लगाया गया।


भीड़ नियंत्रण के लिए हथियारों का विकास

अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने 2018 से रासायनिक हथियारों से संबंधित गतिविधियों की जानकारी छिपाई है, जो कि सीडब्ल्यूसी का उल्लंघन है। 2024 में अमेरिका ने पुष्टि की कि ईरान दवा-आधारित एजेंट विकसित कर रहा है और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जैविक और रासायनिक हथियार भी बना रहा है। इसके अलावा, ईरान पर यह भी आरोप है कि उसने लीबिया में कुछ रासायनिक हथियार भेजे थे।


विषैले हथियारों की संभावनाएं

2004 में सीआईए की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ईरान छोटे पैमाने पर जैविक हथियार बनाने की क्षमता रखता है। उसने जैव प्रौद्योगिकी का बुनियादी ढांचा विकसित किया है। 2011 में अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर जैविक हथियार सम्मेलन का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।


रासायनिक हथियारों की प्रेरणा

इराक और ईरान के बीच युद्ध के दौरान इराक ने रासायनिक हमलों का सहारा लिया था, जिससे ईरान ने भी रासायनिक हथियारों के विकास की दिशा में कदम बढ़ाए। यह जानकारी 2009 में आई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में सामने आई थी।


यूरेनियम पर ध्यान केंद्रित

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल का ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और 400 किलो संवर्धित यूरेनियम पर है। अमेरिका इसे हासिल करने के लिए प्रयासरत है, क्योंकि यदि इसे 90 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया, तो परमाणु बम बनाना आसान हो जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों को चिंता है कि ईरान के जैविक और रासायनिक हथियार कार्यक्रमों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


रासायनिक हथियारों का भंडार

तेहरान के पास दमघन, कजविन, परचिन और इस्फहान में रासायनिक हथियार उत्पादन संयंत्र हैं, जहां हर साल एक हजार टन तक उत्पादन किया जा सकता है। 1993 में रासायनिक हथियार सम्मेलन में शामिल होने के बाद, ईरान ने दावा किया कि उसका केवल एक संयंत्र चालू था।


जैविक हथियार कार्यक्रम की निगरानी

अमेरिका का कहना है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की निगरानी में ईरान में जैविक हथियार कार्यक्रम चल रहा है। ईरान ने 1980 से 1988 के बीच इराक के साथ युद्ध के दौरान जैविक हथियार कार्यक्रम की शुरुआत की थी।


खतरनाक पदार्थों का उपयोग

यह माना जा रहा है कि ईरान अपनी मिसाइलों, मोर्टार, तोप के गोले और ड्रोन में रासायनिक और जैविक हथियार तैनात करने की क्षमता विकसित कर रहा है। 2019 में अमेरिकी विदेश विभाग ने रिपोर्ट में खुलासा किया कि ईरानी विश्वविद्यालयों ने इंसानों को निष्क्रिय करने वाले रासायनिक पदार्थों पर शोध किया।