ईरान के विदेश मंत्री का अमेरिका पर तीखा हमला: क्या है असली वजह?
ईरान का अमेरिका और इजरायल पर आरोप
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपने देश की विदेश नीति और सैन्य सहयोग के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान और रूस के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं और यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहेगा। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी आक्रामक युद्ध की शुरुआत नहीं करना चाहता, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है।
ईरान और रूस के संबंध
एनबीसी के कार्यक्रम “मीट द प्रेस” में अराघची ने ईरान और रूस के संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से ईरान और रूस विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं और यह सहयोग आगे भी जारी रहेगा। हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि रूस ने अमेरिका के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई के लिए ईरान को विशेष खुफिया जानकारी दी है। उनका कहना है कि इस तरह के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
मिसाइल क्षमता पर ईरान का रुख
मिसाइल क्षमता पर ईरान का रुख
ईरान के विदेश मंत्री ने देश की मिसाइल क्षमता के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की अधिकतम रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर तक सीमित रखी है। अराघची के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया ताकि अन्य देशों को ईरान से किसी बड़े खतरे का एहसास न हो। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास की कोई योजना नहीं है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कहा जाता है कि ईरान ऐसी मिसाइलें बना रहा है जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। उनके अनुसार, ईरान की मिसाइल क्षमता मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है।
युद्ध को बताया थोपे जाने वाला संघर्ष
अराघची ने यह भी कहा कि मौजूदा तनाव और संघर्ष ईरान ने शुरू नहीं किया है। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर यह युद्ध थोपा है। उनका कहना है कि ईरान केवल आत्मरक्षा के लिए कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा करने का अधिकार होता है, और ईरान भी इसी सिद्धांत के तहत कार्रवाई कर रहा है।
स्थायी शांति की मांग
ईरान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि उनका देश केवल अस्थायी युद्धविराम नहीं चाहता, बल्कि इस संघर्ष का स्थायी समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह संघर्ष क्यों शुरू हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उनके अनुसार, जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलता, तब तक शांति की दिशा में वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।
स्कूल धमाके को लेकर अमेरिका पर आरोप
अराघची ने 28 फरवरी को एक स्कूल में हुए भीषण विस्फोट के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। इस घटना में 165 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था, लेकिन अराघची ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
अराघची का कहना है कि उपलब्ध सबूत इस ओर इशारा करते हैं कि यह हमला अमेरिकी हवाई कार्रवाई का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि सैटेलाइट तस्वीरों और विशेषज्ञों के विश्लेषण से भी यह संकेत मिलता है कि इस विस्फोट के पीछे हवाई हमला था, जिसमें रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक परिसर को भी निशाना बनाया गया था। अराघची ने सवाल उठाया कि अगर इस घटना के पीछे अमेरिका नहीं है, तो फिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है।