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ईरान के विदेश मंत्री का खौफनाक अनुभव: हमले के दौरान क्या हुआ?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में उस खौफनाक रात का अनुभव साझा किया जब अमेरिका और इजराइल के हमले हो रहे थे। उन्होंने बताया कि सुप्रीम लीडर खामनेई ने अपनी सुरक्षा को छोड़कर नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। इस दौरान उन्होंने पड़ोसी देशों को चेतावनी भी दी कि अगर उनके ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया, तो ईरान इसका कड़ा जवाब देगा। जानें इस संघर्ष की गहराई और इसके संभावित परिणाम।
 

ईरान के सुप्रीम लीडर के दफ्तर में हमले का मंजर

जब आसमान से मौत का मंजर छाया हुआ था और इमारतें मलबे में बदल रही थीं, उस समय ईरान के सुप्रीम लीडर के कार्यालय में क्या गतिविधियाँ चल रही थीं? अमेरिका और इजराइल के विनाशकारी हमलों के बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची किस प्रकार बाल-बाल बचे? 48 घंटों तक सुप्रीम लीडर का कोई पता क्यों नहीं था? लेबनान के एक टीवी चैनल पर अरागची ने उस भयावह रात का जो अनुभव साझा किया, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी को संघर्ष के प्रारंभिक क्षणों में जब सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई के दफ्तर पर हमला हुआ, वह स्वयं उसी इमारत में उपस्थित थे।


अरागची ने उस क्षण को याद करते हुए कहा कि जब वह मलबे से बाहर निकल रहे थे, तो उनकी पहली चिंता सुप्रीम लीडर की सुरक्षा थी। हमले के बाद 48 घंटों तक वह इस अनिश्चितता में रहे कि खामनेई किस स्थिति में हैं। सुरक्षा गार्ड और कमांडरों ने खामनेई को बार-बार बंकर या सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा, लेकिन खामनेई ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'जब तक ईरान के हर नागरिक के पास सुरक्षित स्थान नहीं होगा, मैं कहीं नहीं जाऊंगा। मेरे लोग जो सहेंगे, वही मैं भी सहूंगा।' इस प्रकार, खामनेई ने खतरे के बावजूद वहीं रहकर कामकाज की देखरेख की।


अरागची ने एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि संघर्ष से पहले ही ईरान ने फारस की खाड़ी में अपने पड़ोसी देशों को स्पष्ट चेतावनी दी थी।


उन्होंने कहा कि यदि किसी पड़ोसी देश के अमेरिकी ठिकाने का उपयोग ईरान पर हमले के लिए किया गया, तो ईरान उसका विनाशकारी जवाब देगा। उनका कहना था कि क्षेत्रीय सरकारों ने अपनी भूमि के उपयोग का विरोध किया, लेकिन वाशिंगटन ने उनकी एक नहीं सुनी और ईरान पर हमले कर दिए। अरागची का यह बयान दर्शाता है कि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष कितना भयानक था और कैसे ईरान का शीर्ष नेतृत्व मौत के मुंह से वापस लौटा है। खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर ईरान की यह चेतावनी क्या मध्य पूर्व में एक नए युद्ध की शुरुआत कर रही है?