ईरान के समर्थन में इराक का कट्टरपंथी संगठन सक्रिय
ईरान को इराक के कट्टरपंथी संगठन का समर्थन मिल रहा है, जिसने ईरान के साथ युद्ध में शामिल होने की घोषणा की है। अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद, इराक के क्षेत्रीय युद्ध में शामिल होने का खतरा बढ़ गया है। बगदाद के दक्षिण में हुए हमलों में कई लड़ाके मारे गए हैं। इस स्थिति में कटाइब हिजबुल्लाह और अन्य मिलिशियाएं भी शामिल हो गई हैं। जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी।
Mar 1, 2026, 14:21 IST
ईरान को इराक से मिल रहा समर्थन
ईरान को इराक से महत्वपूर्ण समर्थन मिल रहा है। शिया समुदाय के एक कट्टरपंथी संगठन ने ईरान के साथ युद्ध में इराक का समर्थन करने की घोषणा की है। इस संगठन ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह जानकारी दी है कि वे ईरान के साथ मिलकर लड़ाई में शामिल होंगे। इस प्रकार, इराक का यह कट्टरपंथी समूह अब ईरान के साथ खड़ा हो गया है। दूसरी ओर, अस्थाई काउंसिल अब शासन का कार्यभार संभालेगी, जबकि फजिशियाने के राष्ट्रपति के हाथ में नियंत्रण रहेगा। इसमें न्यायपालिका के प्रमुख भी शामिल होंगे।
अमेरिकी-इजरायली हमलों का खतरा
ईरान पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद, इराक के क्षेत्रीय युद्ध में शामिल होने का खतरा बढ़ गया है। ये हमले सीमा पार कर गए हैं और तेहरान समर्थित मिलिशियाओं को निशाना बनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इन समूहों ने अमेरिकियों पर हमले की चेतावनी दी है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत के कुछ समय बाद, बगदाद के दक्षिण में स्थित कटाइब हिजबुल्लाह पर दो मिसाइल हमले हुए, जिसमें दो लड़ाके मारे गए और पांच अन्य घायल हुए। शनिवार को उसी क्षेत्र में एक और हमला हुआ, लेकिन उसमें कोई हताहत नहीं हुआ।
सरकार ने हमलों की पुष्टि की
सरकार ने जुर्फ अल सखार पर हुए हमलों की पुष्टि की है, लेकिन इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं दी गई है। यह कस्बा, जिसे जुर्फ अल नस्र भी कहा जाता है, बगदाद से लगभग 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और यह शक्तिशाली मिलिशिया के नियंत्रण में है। कटाइब हिजबुल्लाह, अल नुजाबा और सैय्यद अल शुहादा जैसे अन्य छोटे मिलिशियाओं ने भी इस लड़ाई में भाग लिया है और अमेरिकी सैनिकों पर हमले किए हैं। उन्होंने पहले भी इराक और सीरिया में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है, साथ ही इजरायल के अंदर भी ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए हैं।