ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका और अरब देशों की गोपनीय सैन्य बैठक
नई दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ चल रहे सैन्य तनाव और हूती गतिविधियों के बीच अमेरिका, इजरायल और अरब देशों के उच्च रैंक के सैन्य अधिकारियों की एक गोपनीय बैठक का आयोजन किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह बैठक पिछले सप्ताह जर्मनी में हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। इस बैठक में अमेरिका और इजरायल के साथ-साथ आठ अरब देशों के सैन्य प्रमुख भी शामिल हुए।
जर्मनी में कई देशों के सैन्य प्रमुखों की उपस्थिति
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक का आयोजन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था। इसमें इजरायल के अलावा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल थे।
अमेरिकी अधिकारियों ने बैठक की पुष्टि करते हुए बताया कि जर्मनी में एक निर्धारित सम्मेलन के दौरान आठ देशों के सैन्य नेताओं के साथ मिडिल ईस्ट में सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
ईरान और हूतियों के मुद्दे पर चर्चा
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान के साथ तनाव और क्षेत्र में हूती गतिविधियां बढ़ रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में ईरान के साथ चल रहे संघर्ष, क्षेत्रीय सुरक्षा और हूती खतरे जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही और उसकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण विषय रहे। अमेरिका ने पहले ही इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है।
अरब देशों के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग
इस बैठक को इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते सुरक्षा सहयोग के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। 2020 के अब्राहम अकॉर्ड के बाद इजरायल और यूएई-बहरीन के संबंधों में बदलाव आया है और सुरक्षा सहयोग के नए रास्ते खुले हैं।
हालांकि, इस बैठक को सीधे किसी नए युद्ध की तैयारी के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के तरीकों पर चर्चा करना था।
दुनिया की नजरें क्यों हैं इस बैठक पर?
ईरान के साथ तनाव, होर्मुज स्ट्रेट में सैन्य गतिविधियां और लाल सागर क्षेत्र में हूती खतरे के बीच इस प्रकार की उच्चस्तरीय बैठक का होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक में किसी नए सैन्य अभियान का निर्णय लिया गया है या नहीं, इसकी कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।