ईरान के हमले: कुवैत में अमेरिकी एयर बेस पर ड्रोन और मिसाइलों का हमला
ईरान का नया हमला
ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में एक बार फिर से हमले किए हैं, जिसमें अमेरिकी सेना के अली अल सलेम एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। कुवैत की सेना ने जानकारी दी है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। इस तनावपूर्ण स्थिति में, ईरान ने जॉर्डन, बहरीन और एरबिल की ओर भी हमले किए हैं। ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने "ऑपरेशन नस्र 2 के 27वें चरण" के तहत इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।
IRGC का दावा
IRGC ने कहा कि उसने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस पर अत्याधुनिक और विनाशकारी ड्रोन से हमला किया। उनका दावा है कि उन्होंने गोला-बारूद के एक बड़े भंडार को निशाना बनाया, जिससे वह पूरी तरह नष्ट हो गया। बयान में यह भी कहा गया कि बेस पर मौजूद कर्मियों के लिए बनाए गए छह बड़े शेल्टर पूरी तरह से नष्ट हो गए, जबकि तीन अन्य शेल्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए। IRGC ने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में दुश्मन के लोग मारे गए और घायल हुए।
अमेरिका पर आरोप
IRGC ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह युद्ध के मैदान में हुए नुकसान को छिपा रहा है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन हताहतों की संख्या के बारे में अपने नागरिकों से झूठ बोल रहा है और अमेरिकी मीडिया से इस युद्ध की सच्चाई की जांच करने की मांग की।
पेंटागन की रिपोर्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, बुधवार को पेंटागन ने अपनी वेबसाइट पर ईरान युद्ध के दौरान 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत की सूचना दी। हालांकि, गुरुवार तक यह पता चला कि युद्ध विभाग ने हताहतों की संख्या को कम कर दिया है और अब बताया गया है कि युद्ध में 14 अमेरिकी सैनिक मारे गए। इस बदलाव का एक कारण यह बताया गया कि ट्रंप प्रशासन ने पिछले सप्ताहांत मारे गए चार सैनिकों को सूची से हटाने का निर्णय लिया था।
अस्थायी डेटा व्यवधान
पेंटागन के कार्यवाहक प्रेस सचिव, जोएल वाल्डेज़ ने इस बदलाव को वेबसाइट पर "अस्थायी डेटा व्यवधान" बताया, जिसे जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा।