ईरान के होर्मुज स्टेट पर मेदवेदेव का बयान: थर्मोन्यूक्लियर शक्ति का प्रदर्शन
पूर्व रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर खामनेई के अंतिम संस्कार में होर्मुज स्टेट को थर्मोन्यूक्लियर हथियार बताया। उन्होंने ईरान की रणनीतिक शक्ति की सराहना की और कहा कि यह क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति है। अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के बीच, ईरान ने अपने नियंत्रण को साबित किया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और भविष्य में ईरान के कदम क्या हो सकते हैं।
Jul 6, 2026, 12:38 IST
मेदवेदेव का बयान
पूर्व रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई के अंतिम संस्कार में भाग लेते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने होर्मुज स्टेट को ईरान का थर्मोन्यूक्लियर हथियार बताया। मेदवेदेव ने कहा कि ईरान ने इस युद्ध में होर्मुज स्टेट का जिस तरह से इस्तेमाल किया, वह उसकी रणनीतिक शक्ति का एक स्पष्ट संकेत था। उनके अनुसार, ईरान ने एक ऐसा हथियार विकसित किया है जो किसी भी परमाणु हथियार से कम नहीं है। खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के बाद, मेदवेदेव ने ईरान की लड़ाई की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ईरान ने होर्मुज पर अपने नियंत्रण को दिखाकर यह साबित किया है कि वह इस क्षेत्र की एक प्रमुख शक्ति है। युद्ध के दौरान, ईरान ने जहाजों की आवाजाही को रोककर अपनी रणनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया।
ईरान का भविष्य और होर्मुज स्टेट
अब दुनिया भर में इस बात पर चर्चा हो रही है कि ईरान भविष्य में क्या कदम उठाएगा और होर्मुज स्टेट का संचालन कैसे होगा। मेदवेदेव ने ईरान के इस जल क्षेत्र पर नियंत्रण को परमाणु हथियार के समान बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब केवल परमाणु हथियार नहीं, बल्कि थर्मोन्यूक्लियर हथियार भी है, जो होर्मुज स्टेट है। यह किसी भी वैश्विक संघर्ष में उपयोग किया जा सकता है। अमेरिका ने दशकों से ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की चेतावनी दी है, जबकि ईरान ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट रखी है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ एक संधि की थी, लेकिन ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में अमेरिका को इस संधि से बाहर निकाल दिया। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ाया। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भी ईरान को लगातार धमकियां दीं।
अमेरिका और इजराइल का हमला
28 अप्रैल को, अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, जबकि शांति वार्ता चल रही थी। पहले दिन ही ईरान के सुप्रीम लीडर और उनके सुरक्षा बल मारे गए। इसके बाद कई दिनों तक युद्ध जारी रहा, जिसके परिणामस्वरूप ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इस युद्ध के चलते, ईरान ने होर्मुज पर रोक लगा दी, जिससे पूरी दुनिया ऊर्जा संकट का सामना करने लगी। अमेरिका के लिए यह एक बड़ा संकट बन गया। एक महीने के युद्ध के बाद, ट्रंप प्रशासन ने शांति वार्ता की दिशा में कदम बढ़ाए। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों पक्षों के बीच शांति हुई, लेकिन अभी भी समझौता काफी दूर नजर आ रहा है।