ईरान-चीन संबंधों में तनाव: अमेरिका और इज़राइल के हमलों का प्रभाव
तेहरान और बीजिंग के बीच ऊर्जा संबंधों में खटास
अमेरिका और इज़राइल के हमलों के कारण तेहरान एक खुले संघर्ष की ओर बढ़ रहा है, जिससे चीन की तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को खतरा उत्पन्न हो गया है। इस स्थिति में, ईरान के साथ चीन के गहरे ऊर्जा संबंध अब तक के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं। बीजिंग ने इन हमलों की निंदा की है और युद्धविराम की अपील की है, लेकिन उसने किसी भी आर्थिक प्रतिक्रिया से बचने का निर्णय लिया है, जिससे उसकी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को नुकसान हो सकता है। 28 फरवरी को, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की परमाणु सुविधाओं, मिसाइल स्थलों और नेतृत्व केंद्रों पर समन्वित हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया और इसे क्षेत्रीय तनाव के बीच एक निर्णायक प्रहार बताया।
इज़राइल की सैन्य कार्रवाई और ईरान का जवाब
इज़राइल की सैन्य कार्रवाई, जिसे ऑपरेशन रोरिंग लायन कहा गया, का मुख्य उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना था। इस अभियान के तहत, इज़राइल ने ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके जवाब में, ईरानी बलों ने बैलिस्टिक मिसाइलों से इज़राइल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। यह हमला केवल इज़राइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में भी अमेरिकी ठिकानों को प्रभावित किया। इस तनावपूर्ण स्थिति में, दुबई में धमाकों की खबरें भी आईं, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
चीन की ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव
चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जो ईरान के कुल तेल निर्यात का 80 प्रतिशत से अधिक खरीदता है। 2025 तक, यह मात्रा लगभग 13.8 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुँचने की उम्मीद है। हालाँकि, हाल के तनाव के कारण, चीनी रिफाइनरियों ने ईरानी तेल की खरीद में कमी की है और रियायती रूसी तेल पर अधिक निर्भरता बढ़ा दी है।
भविष्य की चुनौतियाँ
विश्लेषक बालाकृष्णन का मानना है कि ईरान की प्रतिक्रिया एक ऐतिहासिक रणनीतिक गलती हो सकती है। ईरान केवल एक मजबूत सैन्य गठबंधन का सामना नहीं कर रहा, बल्कि वह चीन की ऊर्जा और भू-राजनीतिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को भी खतरे में डाल रहा है। ईरान और चीन के बीच 25 साल का सहयोग समझौता है, जिसमें कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई बाधा आती है, तो यह चीन की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
चीन की रणनीतिक स्थिति
चीन के लिए यह स्थिति खतरनाक है, क्योंकि यदि ईरान और अधिक कमजोर होता है, तो वह चीनी निवेश और समर्थन पर अधिक निर्भर हो सकता है। हालांकि, यह रणनीतिक लाभ तब तक कायम रहेगा जब तक कि यह संघर्ष क्षेत्र में व्यापक संकट का रूप नहीं लेता।