ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया
ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने वाशिंगटन पर ईरानी क्षेत्र और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं। बगाई ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अमेरिकी हमलावरों को जवाबदेह ठहराने की मांग की है। ईरान ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का संकल्प व्यक्त किया है। इस विवाद में अमेरिकी अधिकारियों की धमकी भरी बयानबाजी भी शामिल है, जिसे ईरान ने नकारात्मक रूप से देखा है।
May 28, 2026, 19:14 IST
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
गुरुवार को, ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कड़ी निंदा की। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने वाशिंगटन पर ईरानी क्षेत्र और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बंदर अब्बास पर हमले और दक्षिणी ईरान में कथित हवाई हमलों जैसी कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता का उल्लंघन हैं।
संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अमेरिकी हमलावरों को जवाबदेह ठहराने के लिए अपने कानूनी दायित्वों का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा 19 अप्रैल को किए गए युद्धविराम का लगातार उल्लंघन, विशेष रूप से फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और हाल के दिनों में ईरान के दक्षिणी क्षेत्रों पर हवाई हमले, गंभीर चिंता का विषय हैं।
ईरान की आत्मरक्षा का अधिकार
बगाई ने ईरान के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि करते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए ईरान के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
अमेरिकी धमकियों की निंदा
आईएसएनए समाचार एजेंसी के अनुसार, बगाई ने अमेरिकी अधिकारियों की धमकी भरी बयानबाजी की निंदा की और ट्रंप द्वारा देश को नष्ट करने की चेतावनी के संदर्भ में ओमान के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि एक संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश को नष्ट करने की धमकी देना, जिसने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाई है, न केवल बल प्रयोग की धमकी को प्रतिबंधित करने के सिद्धांत का उल्लंघन है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अराजकता का संकेत भी है।