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ईरान ने खोला होर्मुज जलडमरूमध्य, तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट

ईरान ने 49 दिनों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई है। इस कदम से तेल और गैस की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए राहत का संकेत है। जानें इस घटनाक्रम का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा और भविष्य में कीमतों की स्थिरता पर क्या निर्भर करेगा।
 

ईरान की राहत भरी घोषणा


नई दिल्ली: ईरान ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। 49 दिनों के बाद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से खोल दिया गया है। अब युद्धविराम के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाज बिना किसी रुकावट के आवाजाही कर सकेंगे। इस सूचना ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में तुरंत सकारात्मक प्रभाव डाला, जिससे तेल और गैस की कीमतों में तेजी से गिरावट आई।


तेल और गैस की कीमतों में गिरावट

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची द्वारा की गई घोषणा के बाद, तेल की कीमतों में लगभग 9-10 प्रतिशत की कमी आई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 8.46 डॉलर गिरकर 90.93 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 8.87 डॉलर की गिरावट के साथ 85.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


यूरोप के बेंचमार्क गैस कॉन्ट्रैक्ट में भी 8.5 प्रतिशत की कमी आई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता जल्द हो सकता है, जिससे बाजार में राहत की भावना बढ़ी है।


भारत के लिए राहत का कारण

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा नाक है, जहां से लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। पिछले 49 दिनों में होर्मुज बंद रहने से भारत पर काफी दबाव पड़ा था, क्योंकि खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस के टैंकर फंस गए थे, जिससे देश में तेल-गैस की कमी हो गई थी।


अब जब स्ट्रेट खुल गया है, तो तेल और गैस के टैंकर बिना किसी रुकावट के भारत पहुंच सकेंगे। इससे आयात में रुकावट खत्म होगी और पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति में सुधार की उम्मीद है।


भारत पर संभावित प्रभाव

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। होर्मुज के खुलने से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत के लिए फायदेमंद साबित होगी।



  • पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने या थोड़ी कम होने की संभावना है।

  • घरेलू गैस सिलेंडर और सीएनजी की उपलब्धता में सुधार हो सकता है।

  • आयात बिल पर कुछ राहत मिलेगी, जिससे सरकार का खर्च कम होगा।


हालांकि, कीमतों में गिरावट कितनी स्थायी रहेगी, यह ईरान और अमेरिका के बीच स्थायी शांति समझौते पर निर्भर करेगा। यदि युद्धविराम लंबा चला और होर्मुज सुरक्षित रहा, तो भारत को लंबे समय तक लाभ हो सकता है।