ईरान ने ब्रिटेन की सेना और खुफिया एजेंसी को आतंकवादी घोषित किया
ईरान का नया कदम ब्रिटेन के खिलाफ
सैन्य संघर्ष के बीच, ईरान ने ब्रिटेन के खिलाफ एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। तेहरान ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी और रॉयल एयर फोर्स को आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया है। इसके साथ ही, ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई6 को भी शत्रुतापूर्ण समूह के रूप में मान्यता दी गई है। इस निर्णय से दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ने की संभावना है।
ईरान का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को इस निर्णय की जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के सैन्य अभियानों में सहायता कर रहा है। इसके लिए ब्रिटेन ने अपने सैन्य ठिकानों और सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति दी है। ईरान का दावा है कि इस प्रकार की सहायता से ब्रिटेन सीधे तौर पर उसके खिलाफ चल रहे सैन्य अभियानों में शामिल है।
ब्रिटेन की नीतियों पर ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के कार्यों को शत्रुतापूर्ण और गैरकानूनी करार दिया है। मंत्रालय का कहना है कि लंदन की नीतियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। ईरान ने पिछले एक वर्ष में ब्रिटेन द्वारा उठाए गए कदमों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है, जिसमें अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों को समर्थन देना शामिल है।
जुलाई की कार्रवाई का संदर्भ
ईरान ने ब्रिटेन की उस कार्रवाई का भी उल्लेख किया है, जिसमें जुलाई में उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को अपने स्टेट थ्रेट्स एक्ट 2026 के तहत शामिल किया था। ब्रिटेन ने यह कदम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर उठाया था, लेकिन ईरान ने इसे लंदन की शत्रुतापूर्ण नीति का हिस्सा माना है।
ईरान की चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्रालय ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और जवाबी कार्रवाई के अधिकार के तहत उठाया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई के परिणामों के लिए ब्रिटिश सरकार जिम्मेदार होगी।
एमआई6 की स्थिति
यह ध्यान देने योग्य है कि ईरान ने केवल ब्रिटेन की सैन्य इकाइयों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि उसकी विदेशी खुफिया एजेंसी एमआई6 को भी शत्रुतापूर्ण समूह घोषित किया है। एमआई6, जिसे आधिकारिक तौर पर सीक्रेट इंटेलिजेंस सर्विस के नाम से जाना जाता है, ब्रिटेन की विदेशी खुफिया एजेंसी है।
दुनिया की नजरें
किसी देश द्वारा दूसरे देश की सेना या खुफिया एजेंसी को आतंकवादी संगठन घोषित करना, दोनों देशों के बीच गंभीर तनाव का संकेत है। हालांकि, ईरान के इस निर्णय से ब्रिटेन की इन संस्थाओं की कानूनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आएगा, लेकिन यह तेहरान के लंदन के प्रति कड़े रुख को दर्शाता है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल के साथ जारी टकराव के बीच ईरान और ब्रिटेन के संबंधों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है।