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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर पर किया हमला, बढ़ा तनाव

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर 'ट्रेंड' पर हमला किया है, जिसके चलते क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। ईरान का आरोप है कि टैंकर ने उसके निर्धारित मार्ग का उल्लंघन किया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता को जन्म दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

ईरान का टैंकर पर हमला


नई दिल्ली: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह आरोप लगाया है कि उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में टोगो के झंडे वाले तेल टैंकर 'ट्रेंड' को निशाना बनाया। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, यह टैंकर 'गैरकानूनी तरीके से गुजरने' का प्रयास कर रहा था, जिसके चलते इसे रोका गया और हिरासत में लिया गया।


आग लगने के बाद की कार्रवाई

IRGC ने बताया कि टैंकर में आग लगने के बाद उसे निशाना बनाया गया। ईरान का कहना है कि जहाज ने उसके निर्धारित मार्ग से हटकर होर्मुज स्ट्रेट पार करने की कोशिश की। इस घटना ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है। हाल के दिनों में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर निगरानी और सख्ती बढ़ा दी है। ईरान की मांग है कि सभी कमर्शियल जहाज पहले अनुमति लें और उसके बताए मार्ग से ही गुजरें। यह कदम समुद्री सुरक्षा और नियंत्रण के लिए ईरान की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


यूकेएमटीओ की रिपोर्ट

इससे पहले, ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने होर्मुज स्ट्रेट में एक 'सिक्योरिटी इंसिडेंट' की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना ओमान के खासाब से लगभग 29.6 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में हुई थी। हालांकि, UKMTO ने जहाज का नाम या घटना से जुड़ी अधिक जानकारी साझा नहीं की। यह स्पष्ट नहीं है कि क्या यह घटना वही है जिसे ईरान ने 'ट्रेंड' टैंकर से जोड़ा है। इस अस्पष्टता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यहां की हर घटना का वैश्विक प्रभाव पड़ता है।


तनाव की बढ़ती स्थिति

ईरान द्वारा टैंकर पर हमले की घटना से यह स्पष्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता जा रहा है। जहाजों पर सख्ती और सुरक्षा घटनाओं की बढ़ती संख्या से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया किस दिशा में जाती हैं।