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ईरान पर अमेरिका का हमला: क्या फिर से बढ़ेगा तनाव?

हाल के घटनाक्रमों में, अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर एक बड़ा हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध टलने की उम्मीद जताई थी, लेकिन हमले के बाद स्थिति और भी जटिल हो गई है। जानें इस हमले के पीछे की कहानी और क्या है दोनों देशों के बीच बातचीत की स्थिति।
 

नई दिल्ली में तनाव की नई लहर


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की संभावनाओं के बीच हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर एक बड़ा हमला किया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब कुछ घंटे पहले ही अमेरिकी नेतृत्व ने दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाओं का संकेत दिया था।


छोटे स्तर पर हमले की जानकारी

'वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका पिछले कुछ हफ्तों से ईरान के खिलाफ छोटे स्तर पर सैन्य हमले कर रहा था। इन कार्रवाइयों को सीमित और गुप्त रखा गया ताकि यह न लगे कि अमेरिका ने अपना सैन्य अभियान फिर से शुरू किया है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित केशम द्वीप पर कई धमाके हुए हैं। हालांकि, हमले से होने वाले नुकसान की विस्तृत जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।


ट्रंप की युद्ध टलने की उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि ईरान के साथ बड़ा युद्ध टल सकता है। उन्होंने तेल की कीमतों में गिरावट को भी इसी उम्मीद से जोड़ा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि तेल का भाव लगभग 10 डॉलर प्रति बैरल गिर गया है। उन्होंने इसे रिकॉर्ड गिरावट बताते हुए कहा कि ईरान जल्द ही अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है।


संवाद के संकेत

हमले की खबर से कुछ घंटे पहले, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी बातचीत के सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ कई अच्छी बातचीत हुई है और इस मुद्दे पर उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी चर्चा हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, वेंस ने पिछले सप्ताह ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा था, हालांकि उन्होंने पत्र की सामग्री साझा नहीं की। वेंस ने बातचीत में प्रगति का जिक्र करते हुए समझौते की उम्मीद जताई थी।


ट्रंप का सैन्य विकल्प

अमेरिका में मध्यावधि चुनावों के दौरान, ट्रंप ईरान पर बड़े हमले से बचते नजर आ रहे थे। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखने की बात कही थी। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव खत्म होने के बाद ट्रंप पर ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला करने का दबाव बना रहे थे।