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ईरान पर अमेरिका के हमलों से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

हाल ही में अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों के आरोपों ने मिडिल ईस्ट में तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। ईरान ने बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमले का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने इस पर कोई पुष्टि नहीं की है। ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका की आलोचना की है और कहा है कि यह स्थिति शांति समझौते को खतरे में डाल सकती है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

मिडिल ईस्ट में तनाव की नई लहर

अमेरिका द्वारा ईरान पर नए हमलों के आरोपों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव फिर से उभर आया है। ईरान ने दावा किया है कि गुरुवार को अमेरिकी सेना ने बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को निशाना बनाया, लेकिन वॉशिंगटन ने अभी तक इस हमले की पुष्टि नहीं की है। सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी (IRNA) के अनुसार, ये हमले दोपहर के समय हुए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों से कोई नुकसान हुआ या हताहत हुए। इन कथित हमलों के कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गई हैं。


बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट का इतिहास

बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को ईरान ने रूस के सहयोग से स्थापित किया था, और यह तेहरान से 1,200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 2025 में हुए युद्ध के दौरान अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने इस प्लांट पर हमला नहीं किया था, लेकिन ईरान का कहना है कि इस साल कम से कम पांच बार अमेरिकियों ने इसे निशाना बनाया है। बार-बार हुए हमलों में प्लांट के एक कर्मचारी की मौत भी हुई है, लेकिन इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के अनुसार, रेडिएशन के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई है।


ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने बार-बार बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट को निशाना बनाने के लिए अमेरिका की आलोचना की है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने अप्रैल में एक्स (पूर्व ट्विटर) पर कहा, "रेडियोएक्टिव फॉलआउट से तेहरान में नहीं, बल्कि GCC की राजधानियों में जीवन खत्म हो जाएगा। हमारे पेट्रोकेमिकल्स पर हमले भी असली मकसद को जाहिर करते हैं।"


शांति समझौते पर सवाल

ईरान के ये आरोप US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के उस बयान के कुछ घंटों बाद आए, जिसमें कहा गया था कि उसने ईरान के खिलाफ हमलों का एक और दौर पूरा कर लिया है। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है। CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के 90 सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय निगरानी के साधन, मिसाइल और ड्रोन रखने की जगहें, नौसेना की क्षमताएं और सैन्य लॉजिस्टिक्स का बुनियादी ढांचा शामिल था। इससे पहले, अमेरिकी सेना ने 7 जुलाई को ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। एक बयान में कहा गया, "अमेरिकी सेना सतर्क और घातक बनी हुई है, और कमांडर-इन-चीफ के आदेशों पर ऑपरेशन करने के लिए तैयार है।"