ईरान पर अमेरिकी सैन्य दबाव: ट्रंप की नई रणनीति और चुनावी चुनौतियाँ
अमेरिका का ईरान के खिलाफ बढ़ता सैन्य दबाव
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ अमेरिका का सैन्य दबाव अब पहले से कहीं अधिक बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को 2027 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, आर्थिक दबाव और रणनीतिक विकल्पों को बढ़ाने की योजना का हिस्सा माना जा रहा है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, हेगसेथ ने पहले ईरान के खिलाफ एक सीमित और त्वरित सैन्य अभियान की योजना बनाई थी। लेकिन अब स्थिति काफी बदल चुकी है। मध्य पूर्व में लगभग 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनके साथ 19 युद्धपोत, लड़ाकू विमानों की टुकड़ियां, वायु रक्षा दल और पैराट्रूपर्स भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, कई सैन्य इकाइयों को पहले से अधिक समय तक क्षेत्र में बने रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सैनिकों और उनके परिवारों पर दबाव बढ़ रहा है।
नौसेना की तैनाती में वृद्धि
अमेरिकी सेना की वायु रक्षा इकाइयों की तैनाती को पहले नौ महीने के लिए निर्धारित किया गया था, जिसे अब एक साल तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, यूरोप और प्रशांत क्षेत्र से भेजी गई कुछ इकाइयां भी निर्धारित समय से अधिक समय तक वहां मौजूद हैं। अमेरिकी नौसेना की स्थिति भी इसी तरह की है, जहां 19 युद्धपोत तैनात हैं, जिनमें दो विमानवाहक पोत और 13 गाइडेड मिसाइल विध्वंसक शामिल हैं। युद्ध की शुरुआत में भेजे गए यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक और यूएसएस स्प्रुआंस अब नाकाबंदी में सहायता कर रहे हैं, और इन पर तैनात लगभग 300 कर्मियों को महीनों तक समुद्र में रहना पड़ रहा है।
आर्थिक दबाव के माध्यम से ईरान को झुकाने की कोशिश
ट्रंप प्रशासन अब ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिसका उद्देश्य ईरानी नेतृत्व को बातचीत की मेज पर लाना और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप अपने सहयोगियों के साथ युद्ध समाप्ति की घोषणा पर चर्चा कर रहे हैं। उनका मानना है कि आर्थिक दबाव ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए मजबूर कर सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने ईरानी जनता से अपने नेतृत्व के खिलाफ उठ खड़े होने की अपील भी की है।
चुनाव से पहले ट्रंप की चुनौतियाँ
अमेरिकी राष्ट्रपति के सहयोगियों को चिंता है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो यह नवंबर के मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि वह सैन्य निर्णय चुनावी परिणामों को ध्यान में रखकर नहीं ले रहे हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि अमेरिका ईरान पर जरूरत पड़ने पर किसी भी समय दोबारा हमला करने के लिए तैयार है। ट्रंप ने अमेरिकी निगरानी और सैन्य क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। वाशिंगटन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने की रणनीति जारी रखने का संकेत दिया है, जिसमें ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी शामिल है।