ईरान में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले से हड़कंप
हाल ही में अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान में सैन्य हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। फ़्लाइट ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि ईरानी एयरस्पेस को खाली कर दिया गया है और कमर्शियल फ़्लाइट्स को अन्य स्थानों पर भेजा गया। इज़राइल के अधिकारियों ने इसे तेहरान से उत्पन्न खतरों को बेअसर करने के लिए एक पूर्व नियोजित कार्रवाई बताया। इस हमले के बाद इज़राइल में सुरक्षा उपायों को तुरंत लागू किया गया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
Feb 28, 2026, 19:43 IST
ईरान में मिलिट्री हमले का विवरण
अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान में सैन्य हमले किए हैं। फ़्लाइट ट्रैकिंग डेटा से यह स्पष्ट होता है कि ईरानी एयरस्पेस को खाली कर दिया गया है, और कमर्शियल फ़्लाइट्स को तेजी से अन्य स्थानों पर भेजा गया। फ़्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफ़ॉर्म Flightradar24 ने X पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें दिखाया गया कि हमले के तुरंत बाद विमान तेजी से ईरानी एयरस्पेस से बाहर निकल गए, जिससे देश का आसमान साफ़ नजर आने लगा। ईरानी अधिकारियों ने तुरंत अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया, जिससे वाणिज्यिक विमान को क्षेत्र से बाहर जाने के लिए नया मार्ग अपनाना पड़ा। Flightradar24 की क्लिप में कई पड़ोसी देशों के कॉरिडोर में ट्रैफिक का रूट बदला हुआ दिखा, जबकि सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ईरानी आसमान अधिकांशतः खाली हो गया।
हमले की प्रतिक्रिया
इन हमलों की गूंज पूरे ईरान में सुनाई दी। इज़राइली अधिकारियों ने इसे तेहरान से उत्पन्न खतरों को बेअसर करने के लिए एक पूर्व नियोजित कार्रवाई बताया। इज़राइल के रक्षा मंत्री कैट्ज़ ने कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान से उत्पन्न खतरों को समाप्त करना था, और यह हमला अमेरिकी सेना के सहयोग से किया गया। शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान में धमाकों की आवाज़ें दूर-दूर तक सुनी गईं, जिसमें कई ज़िलों में जोरदार धमाके हुए, जिनमें केंद्रीय सड़कें और सरकारी कॉम्प्लेक्स शामिल थे। शहर के ऊपर उठते धुएं के घने गुबार ने हमले के पैमाने को दर्शाया, जो तेहरान, यरुशलम और वाशिंगटन के बीच पहले से ही बढ़ते तनाव के बीच हुआ।
सुरक्षा उपाय और संभावित खतरे
पड़ोसी इज़राइल में सिविल डिफेंस के उपाय तुरंत लागू किए गए। अधिकारियों ने एयर रेड सायरन बजाए और आम लोगों को ईरान के संभावित प्रतिशोध की आशंका में सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी। विश्लेषकों का कहना है कि दोनों पक्षों के नागरिकों और बुनियादी ढांचे को खतरा बना रह सकता है, क्योंकि बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव का डर बढ़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमले में इज़राइल का समर्थन किया है, और कहा कि इस ऑपरेशन का उद्देश्य तेहरान को अपने न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से बनाने से रोकना था।