ईरान में अमेरिकी वायुसेना का तगड़ा हमला: B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर्स की भूमिका
नई दिल्ली में बढ़ते सैन्य तनाव
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष में, अमेरिकी वायुसेना ने अपने तीन प्रमुख रणनीतिक बॉम्बर्स, B-1 लैंसर, B-2 स्पिरिट और B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस को एक साथ मोर्चे पर तैनात किया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद से, अमेरिकी हमलों की तीव्रता में लगातार वृद्धि हो रही है। जुलाई तक, इन विमानों का उपयोग ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल बंकरों, परमाणु सुविधाओं, कमांड सेंटरों और तेल से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों पर हमलों के लिए किया जा रहा है।
अमेरिकी सेना की रणनीति
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने तीनों बॉम्बर्स को विभिन्न भूमिकाओं में तैनात किया है, जिससे अभियान की प्रभावशीलता में वृद्धि हुई है। लगातार हो रहे हमलों के कारण ईरान की कई सैन्य क्षमताओं और एयर डिफेंस नेटवर्क पर दबाव बढ़ा है।
B-52 का प्रभावी उपयोग
लॉन्च साइट्स को निशाना बनाने के लिए किया गया इस्तेमाल
B-52 स्ट्रैटोफोर्ट्रेस, अमेरिकी वायुसेना का सबसे पुराना लेकिन अत्यधिक विश्वसनीय लंबी दूरी का रणनीतिक बॉम्बर है। इसकी रेंज लगभग 14,200 किलोमीटर है और यह 31,500 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है। इसका उपयोग युद्ध के दौरान तेल प्रतिष्ठानों, एयरबेस और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाने के लिए किया गया है।
B-1B की क्षमताएँ
कितने हथियार ले जा सकता B-1B
B-1B लैंसर अपनी सुपरसोनिक गति और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यह लगभग 34,000 किलोग्राम तक हथियार ले जा सकता है और तेज रफ्तार से दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले करने में सक्षम है। रिपोर्टों के अनुसार, इसका उपयोग मिसाइल भंडारण केंद्रों और कमांड सुविधाओं को निशाना बनाने में किया गया है।
B-2 स्पिरिट की विशेषताएँ
दूसरी ओर, B-2 स्पिरिट दुनिया के सबसे उन्नत स्टेल्थ बॉम्बर्स में से एक है। इसकी रडार से बचने की क्षमता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। लगभग 11,000 किलोमीटर की रेंज वाला यह विमान बंकर बस्टर बमों सहित उच्च क्षमता वाले हथियार ले जा सकता है। अमेरिकी सेना ने इसका उपयोग ईरान की अत्यधिक सुरक्षित परमाणु और भूमिगत सैन्य सुविधाओं पर सटीक हमलों के लिए किया है।
युद्ध की स्थिति में बदलाव
लगातार बदल रही युद्ध की स्थिति
B-52 की लंबी दूरी की मारक क्षमता, B-1 की तेज प्रतिक्रिया और B-2 की स्टेल्थ तकनीक का संयुक्त उपयोग अमेरिका को अभियान में सामरिक बढ़त दे रहा है। हालांकि, युद्ध की स्थिति लगातार बदल रही है और दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में संभव नहीं हो पाई है। ऐसे में संघर्ष के अंतिम प्रभाव का आकलन आने वाले समय में ही स्पष्ट हो सकेगा।